
मां-बेटी की हत्या मामला: अदालत से सात को उम्रकैद की सजा
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने दमोह जिले की हटा अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें आरोपी को फिर से जमानत कराने का आदेश दिया गया था। जस्टिस अतुल श्रीधरन की सिंगल बेंच ने यह निर्देश दिए। बताया गया है कि छतरपुर निवासी बलदेव लोधी ने याचिका में कहा कि वह बीएनपी कंपनी में एजेंट था। लोगों की जमा रकम लेकर कंपनी भाग गई। इस पर पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। इस मामले में उसे हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी थी।
जमानत के बाद बढ़ी धाराएं
जमानत कराने के बाद उसके खिलाफ धारा 409, 120 बी और 34 बढ़ा दी गई। पुलिस ने उसे दोबारा जमानत कराने के लिए कहा। उसने अदालत में आवेदन दायर कर कहा कि उसकी एक बार हाईकोर्ट से जमानत हो गई, उसे दोबारा जमानत कराने की जरूरत नहीं है। निचली अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ धाराएं बढ़ा दी गई है, इसलिए उसका पूर्व का जमानत आदेश स्वमेव निरस्त हो गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि एक बार जमानत होने के बाद दोबारा उसी मामले में जमानत कराना जरूरी नहीं है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोबारा जमानत कराने का आदेश निरस्त कर दिया।
धोखेबाज को अग्रिम जमानत नहीं
जिला अदालत ने धोखाधड़ी के आरोपी विश्वनाथ भसीन की जमानत अर्जी खारिज कर दी। उसे प्रमोद भसीन के साथ आरोपी बनाया गया है। विश्वनाथ प्रकरण दर्ज होने के बाद से फरार है। उसकी ओर से गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत अर्जी दायर की गई। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार पाठक की कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी। आपत्तिकर्ता परमानंद साहू के अधिवक्ता अर्णव तिवारी ने तर्क दिया कि आरोपी आदतन अपराधी है। पूर्व में उसके खिलाफ माढ़ोताल थाने में धारा 420 का प्रकरण दर्ज हुआ था। वह फर्जी अनुबंध के जरिए लाखों रुपए ऐंठ चुका है। मामले का दूसरा आरोपी प्रमोद भसीन 23 जनवरी 2019 को संजीवनी नगर पुलिस द्वारा गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। उसने 29 जनवरी को जमानत ले ली। अब फरार आरोपी विश्वनाथ बिना गिरफ्तारी जमानत हासिल करने की फिराक में है।
यहां सरकार से मांगी रिपोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने यूनिहोम्स कोलाज ग्रुप भोपाल के संचालक बिल्डर्स के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस जेपी गुप्ता की सिंगल बेंच ने इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया। अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने यूनिहोम्स रहवासी एसोसिएशन की ओर से कोर्ट को बताया कि 500 से अधिक ग्राहकों की एसोसिएशन ने पुलिस पर निष्क्रियता व बिल्डरों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। एक साल पहले संचालकों व बिल्डर्स के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराए गए थे। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने पुलिस को संपूर्ण जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। राज्य की ओर से अतिरिक्तमहाधिवक्ता अजय गुप्ता ने पक्ष रखा।
Published on:
1 Feb 2019, 7:25 PM IST
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