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सिजेरियन हो या नॉर्मल प्रसव, शिशु के हाथ में न पकड़ाएं नोट-गिफ्ट, संक्रमित हो रहे बच्चे

विशेषज्ञों के अनुसार नवजात शिशु में पीलिया सामान्य, लक्षण होने पर तुरंत कराएं जांच

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जबलपुर. घर में लाड़ली लक्ष्मी आई हो या फिर बेटे का जन्म हो, शिशु को बार-बार हाथ न लगाएं। उसके हाथ में नोट, गिफ्ट न पकड़ाएं। इससे उसे संक्रमण हो सकता है। नवजात के अस्पताल में रहने या घर ले जाने के बाद भी संक्रमण का खतरा रहता है। स्वच्छता में लापरवाही बरतने पर भी शिशु के बार-बार बीमार पडऩे का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार शिशुओं में होने वाला पीलिया इससे बिल्कुल अलग है। शिशु के शरीर में प्राकृतिक रसायन पित्तरंजक ज्यादा मात्रा में बनने से पीलिया होता है।

ऐसे समझें

विशेषज्ञों के अनुसार सभी स्वस्थ शिशुओं में से आधे से ज्यादा को जन्म के पहले सप्ताह में पीलिया होता है। समय से पहले जन्मे शिशुओं में यह और भी ज्यादा आम है। अधिकतर माता-पिता नवजात शिशु को पीलिया होने की बात सुनकर घबरा जाते हैं। जबकि, वयस्कों में पीलिया यकृत (लीवर) में समस्याओं के कारण होता है। शिशुओं को पीलिया होने का कारण शरीर में प्राकृतिक रसायन पित्तरंजक (बिलीरुबिन) का ज्यादा मात्रा में बनना है। यह आमतौर पर जन्म के दो या तीन दिन बाद दिखाई देता है।

नवजात शिशुओं में बिलिरुबिन का स्तर ज्यादा

विशेषज्ञों के अनुसार जब नवजात के शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं अपने जीवन चक्र के अंतिम चरण में पहुंचकर टूटने लगती हैं, तब बिलिरुबिन बनता है। नवजात शिशुओं में इसका स्तर ज्यादा होता है। नवजात का यकृत बिलिरुबिन का संसाधन इतनी कुशलता से नहीं कर पाता। यह सब गर्भ के बाहर की जिंदगी में समायोजित होने का हिस्सा है। जब तक शिशु स्वस्थ रहता है, उसे पीलिया से उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। एक-दो हफ्ते में स्वत: ठीक हो जाएगा।

ये सावधानी बरतें

- मां को पोषण और सुपाच्य आहार दें

- साफ-सफाई का ध्यान रखें- जच्चा-बच्चा को पर्याप्त नींद व आराम मिले

- बाहर से आने पर हाथ सेनेटाइज किए बिना बच्चे को गोद नहीं लें- बच्चे के हाथ में नोट-गिफ्ट न दें

इनका कहना है

डिलेेवरी सिजेरियन हो या नॉर्मल,कुछ सामान्य सावधानी बरतकर माता और नवजात शिशु को बीमार होने से बचाया जा सकता है। उनकी स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें। माता को पोषण और सुपाच्य आहार दें। नवजात के हाथ में नोट, गिफ्ट पकड़ाना और हाथ साफ किए बिना गोद लेने से संक्रमण हो सकता है। हालांकि बच्चों में होने वाला पीलिया शरीर में बिलीरुबिन ज्यादा मात्रा में बनने से होता है। इसे फिजियोलॉजिकल जॉन्डिस भी कहा जाता है।

डॉ. कविता एन. सिंह, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग विभाग, मेडिकल अस्पताल

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