कृषि विभाग और जिला विपणन संघ के कार्यालय का चक्कर काट रहे किसान
जबलपुर। जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की खरीदी प्रक्रिया समाप्त हुए 19 दिन बीत गए हैं। लेकिन, सभी किसानों को अभी तक पूरा भुगतान नहीं हुआ है। वे कृषि विभाग और जिला विपणन संघ के कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। कुल खरीदी में 42 हजार क्विंटल मूंग ऐसी है, जिसका अपग्रेडेशन के बिना भंडारण नहीं होगा। इसकी कीमत 32 करोड़ 58 लाख रुपए है। किसानों को आरोप है कि जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा सभी किसानों को भुगतना पड़ रहा है। यदि मूंग के कुछ लॉट में समस्या है, तो सिर्फ सम्बंधित किसानों की ही रकम रोकी जानी चाहिए।
मूंग खरीदी में अनियमितताओं के आरोपों के कारण यह विवाद में है। मझौली में अमरलता एग्रीकल्चर प्रोडयूसर कंपनी लिमिटेड ने सियाराम वेयर हाउस में 8100 क्विंटल मूंग की फर्जी खरीदी कर उपार्जन पोर्टल पर दर्ज कर दी। इसलिए मामले में एफआइआर दर्ज कराई गई।
3 लाख 70 हजार क्विंटल की खरीदी
जिले में इस बार समर्थन मूल्य पर मूंग की बिक्री के लिए 19400 किसानों ने पंजीयन कराया था। इसमें अलग-अलग खरीदी केंद्रों के लिए 14600 स्लॉट बुक कराए गए थे। 12 हजार 10 किसानों ने अपनी उपज बेची। समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंग की मात्रा 3 लाख 78 हजार क्विंटल थी। इसका मूल्य 294 करोड़ रुपए होता है। इसमें से अभी तक महज 127 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ है।
नहीं आई जांच रिपोर्ट
जिले में सियाराम और दूसरे वेयरहाउस में मूंग खरीदी की जांच के लिए भोपाल से आई टीम की रिपोर्ट अब तक जारी नहीं हुई। संयुक्त टीम ने भी अमरलता एग्रीकल्चर प्रोडयूसर कंपनी लिमिटेड की खरीदी में अनियमितता पाई थी। कुछ दूसरे वेयरहाउस में मात्रा कम मिली थी।