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कोरोना वैक्सीन तो दूर की बात है, पहले ऑक्सीजन बेड का तो इंतजाम हो जाए

जबलपुर शहर में डेडिकेटेड हॉस्पिटल की महसूस हो रही कमी, मेडिकल की पुरानी बिल्डिंग में भी बनाए जा रहे कोविड वार्ड    

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जबलपुर। कोरोना जबलपुर शहर में बेकाबू हो गया है। सितम्बर की शुरुआत में ही प्रतिदिन मिलने वाले नए पॉजिटिव केस का औसत दो सौ पर पहुंच गया है। कोरोना संक्रमण के प्रभावी होते ही मरीजों को सांस लेने में समस्या होती है। उनको ऑक्सीजन बेड की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। संक्रमण की जैसी रफ्तार बनी हुई है अभी ही ऑक्सीजन बेड की कमी पड़ रही है। अभी एक्टिव केस बढऩे के साथ ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में पुरानी बिल्ंिडग के वार्ड भी एक के बाद एक कोविड वार्ड में तब्दील किए जाने लगे हैं।
अभी ये है व्यवस्था
- 400 बिस्तर मेडिकल कॉलेज में
- 200 बिस्तर सुखसागर सेंटर में
- 60 बिस्तर विक्टोरिया अस्पताल में
- 350 बिस्तर निजी अस्पतालों में
-मिलेट्री, रेलवे, एसएएफ हॉस्पिटल में भी संक्रमित के उपचार की सुविधा है।

जिले की स्थिति
- 12 सौ के करीब बिस्तर कोविड आइसोलेशन के लिए
- 03 हजार के लगभग बिस्तर सरकारी क्वारंटीन सेंटर्स में
- 150 के करीब वेंटीलेटर सभी अस्पताल मिलाकर
- 02 सौ के करीब आइसीयू सारे हॉस्पिटल मिलाकर

कोरोना मरीज के लिए
- 400 के करीब ऑक्सीजन बेड मेडिकल कॉलेज में
- 150 के लगभग ऑक्सीजन बेड निजी अस्पतालों में
ऑक्सीजन की खपत
- 02 सौ के करीब सिलेंडर प्रतिदिन मेडिकल कॉलेज में पहले लगते थे
- 06 सौ के लगभग सिलेंडर अब प्रतिदिन कोरोना काल में लग रहे हैं

कोरोना के हाई रिस्क मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती किए जा रहे हैं। कोरोना काल की शुरुआत में मेडिकल अस्पताल के प्राइवेट वार्ड और सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को कोविड वार्ड बनाया गया था। मरीज बढ़े तो स्पाइनल इंज्यूरी सेंटर में करीब 80, पल्मोनरी मेडिसिन में करीब 60 और अब स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की नई बिल्ंिडग को कोविड वार्ड में बदल दिया गया है। कॉलेज प्रबंधन ने तेजी से सामान्य बिस्तरों को ऑक्सीजन लाइन से कनेक्ट किया है। अब तक करीब चार सौ ऑक्सीजन बेड बन चुके हैं। संक्रमित की संख्या लगातार बढऩे से अब मेडिकल अस्पताल के पहली मंजिल के बाद दूसरी मंजिल में मेडिसिन वार्ड में भी ऑक्सीजन लाइन बिछाई गई है। संक्रमित बढऩे पर उनके आइसोलेशन और भर्ती करके उपचार के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं करने की दिशा में एक बार फिर प्रशासन सक्रिय हो गया है। नजर एक बार फिर सुखसागर सेंटर पर है। सुख सागर में कोरोना उपचार को लेकर संचालक से प्रशासन ने प्रस्ताव मांगा है। निजी अस्पतालों की तरह सुखसागर को भी कोविड उपचार करने की अनुमति देने पर विचार हो रहा है। भोपाल में चिरायु और इंदौर के अरबिंदो मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर सुखसागर सेंटर को कोरोना उपचार के लिए अधिग्रहित करने को लेकर भी चर्चा एक बार फिर चल पड़ी है। सरकारी अस्पतालों में सीमित सुविधा और निजी अस्पतालों की महंगी फीस के कारण नए कोरोना मरीजों में होम आइसोलेट होने वाले बढ़े हैं। अस्पतालों में भीड़ कम करने और जरूरत मंद मरीजों को उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी बिना और सामान्य लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में प्राथमिकता दे रहा है। नए संक्रमित में करीब आधे मरीज घर पर ही आइसोलेट है। इससे होम आइसोलेशन में भी कई मरीज ऑक्सीजन घर पर रख रहे हैं।