
town hall jabalpur
जबलपुर। टाउन हॉल, ब्रिटिश शासनकाल के नगर पालिका कार्यालय में देश की आजादी के आंदोलन को कुचलने की कोशिश के बाद झंडा सत्याग्रह शुरू हुआ था। उस समय नगर पालिका के सभापति एड. बाबू कनछेदी लाल जैन और डिप्टी कमिश्नर मिस्टर ब्लेनर हैसिट थे। अक्टूबर 1922 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का प्रतिनिधिमंडल दिल्ली से जबलपुर आया था। इसमें पं. मोतीलाल नेहरू, डॉ. अंसारी, विट्ठल भाई पटेल, राजगोपालाचारी, कस्तूरी रंगा आयंगर शामिल थे। उन्हें सिविल लाइन स्थित गोविंद भवन में ठहराया गया था। बाद में इसे आरटीओ कार्यालय बना दिया गया। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मंशा के अनुरूप टाउन हॉल में तिरंगा फहराया था। इसके बाद लॉर्ड विंटरटन ने किसी भी शासकीय या अर्द्धशासकीय इमारत में बगावत का प्रतीक ध्वज नहीं फहराने का आदेश जारी किया था।
मार्च 1923 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जमुना लाल बजाज, देवीदास गांधी और मौलाना मुअज्जम अली का शिष्टमंडल यहां आया। इस बार भी नगर पालिका कार्यालय में ध्वज फहराने का मांग पत्र भेंट करने का निर्णय किया गया। इतिहासकार व पुरातत्वविद् राजकुमार गुप्ता ने बताया कि तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर ने यह कहते हुए मांग पत्र लेने से मना कर दिया कि केवल ब्रिटिश शासन का झंडा फहराया जा सकता है। लेकिन, नगर पालिका के सभापति कनछेदी लाल ने कहा कि भवन में केवल एक ध्वज तिरंगा ही रहेगा।
छावनी में तब्दील हो गया था टाउन हॉल
ब्रिटिश शासन ने टाउन हॉल की घेराबंदी कर पुलिस बल लगा दिया था। प्रवेश द्वार पर कड़ा सुरक्षा पहरा होने के कारण मांगपत्र भेंट नहीं किया जा सका। इसके बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने टाउन हॉल में तिरंगा फहराने का निश्चय किया। उस समय तपस्वी सुंदरलाल आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उन्होंने कहा कि सत्याग्रह के लिए 2 हजार सत्याग्रही चाहिए। पं. सुंदरलाल, बालमुकुंद त्रिपाठी, बद्रीनाथ दुबे, सुभद्रा कुमारी चौहान, ताजुद्दीन, एड. अब्दुल रहीम, पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी की टोली ने मोर्चा सम्भाला।
लोगों ने स्वेच्छा से किया दान
सत्याग्रह के लिए बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से दान देने के लिए पहुंचने लगे। श्याम सुंदर भार्गव ने इसकी अगुवाई की। 18 मार्च, 1923 को जुलूस ओमती पुल होते हुए सिविल लाइन की ओर बढ़ा। जुलूस के टाउन हॉल पहुंचने पर पीछे की पंक्ति में चल रहे उस्ताद प्रेमचंद जैन टाउन हॉल में प्रवेश कर ऊपरी गुम्बद तक पहुंच गए। सीताराम जाधव, परमानंद जैन, कुशाल चंद जैन ने उनकी सहायता की। पुलिस ने बलपूर्वक नीचे उतारा और झंडे का अपमान किया।
Published on:
11 Aug 2022 03:58 pm
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