
मुंबई के दादर में सोने के गहनों की लूट
जबलपुर। शुद्ध और प्रमाणिक ज्वेलरी के लिए हॉलमार्क की अनिवार्यता होने के बाद भी जिले में रजिस्ट्रेशन कराने वालों की संख्या सीमित है। यह ग्राहक और कारोबारी दोनों के लिए ठीक नहीं है। बाजार में भी इसका फर्क पड़ता है। व्यापारियों के बीच दूरी बढ़ रही है, जिनके रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं वे बिना हॉलमार्क के चल रहे प्रतिष्ठानों को लेकर परेशान हैं। इससे विवाद भी हो रहे हैं।
जिले में कारोबार कर रहे 800 कारोबारी, मांग के बावजूद हॉलमार्क 300 के पास
हॉलमार्क ज्वेलरी, रजिस्ट्रेशन में नहीं आ रही तेजी
जिले में सोना-चांदी के आभूषणों का बड़ा कारोबार है। यह प्रदेश के उन शहरों में शामिल है जहां हॉलमार्क की अनिवार्यता है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में डेढ़ हजार से अधिक कारोबारी हैं जो कि आभूषणों की खरीदी और बिक्री करते हैं। इसमें 700 से 800 ऐसे दुकानदार हैं जिनके कि छोटे एवं बडे़ शोरूम और दुकानें हैं। इनमें से हॉलमार्क रजिस्ट्रेशन लेने वालों की संख्या 300 है। बाकी बिना हॉलमार्क के आभूषण बेच रहे हैं। हालांकि 40 लाख रुपए सालाना कारोबार वाले ज्वेलर्स को रजिस्ट्रेशन से छूट है।
हॉलमार्क ज्वेलरी की अपनी पहचान होती है। उसमें तमाम प्रकार के चिन्ह जो कि सोने की शुद्धता की पहचान तय करते हैं। एचयूआइडी नंबर मिलने पर इसकी प्रमाणिकता और बढ़ जाती है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को होता है। हालांकि जितनी संख्या में रजिस्ट्रेशन होना चाहिए, वह नहीं हो पाया है। बीआइएस भी इस दिशा में पुख्ता काम नहीं कर पा रहा है। इसलिए रजिस्ट्रेशन धीरे-धीरे बढ़ पा रहा है। ग्राहकों को इस दिशा में जागरूक करने की जरुरत है।
नहीं हो पाती है नियमित जांच
जिले में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) की तरफ से नियमित जांच भी नहीं की जाती है। कम संख्या में सेंपल जांच होती है। ऐसे में विक्रेता भी गड़बड़ी कर देता है। उसका नुकसान ग्राहक को होता है। उसे पता नहीं होता है कि उसे शुद्ध सोना मिल पा रहा है या नहीं। क्योंकि बीच में कुछ जगहों पर फर्जी सील और मार्किंग की सूचना भी सामने आई थी।
हॉलमार्क ज्वेलरी शुद्धता का प्रमाण होता है । ग्राहकों को अब ऐसी ही ज्वेलरी खरीदना चाहिए। जबलपुर में ज्वेलर्स को रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्टाफ की कमी की वजह से जांच नियमित रूप से नहीं हो पाती है।
विपिन भास्कर, डिप्टी डायरेक्टर बीआइएस भोपाल
हम लगातार कारोबारियों को हॉलमार्क के पंजीयन के लिए प्रेरित करते हैं। इसका फायदा उन्हें और ग्राहक दोनों को होता है। 300 कारोबारियों ने पंजीयन कराया है, लेकिन अभी यह संख्या संतोषजनक नहीं है। अच्छी बात यह है कि जबलपुर में तीन सेंटर हॉलमार्क कर रहे हैं।
राजा सराफ, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन जबलपुर
यह है स्थिति
1500 जिले में छोटे और बडे़ ज्वेलर्स ।
800 दुकानें और शोरूम का संचालन।
300 ज्वेलर्स के पास हॉलमार्क रजिस्ट्रेशन।
08-10 करोड़ का कारोबार प्रतिदिन।
03 हॉलमार्क सेंटर चल रहे हैं जिले में।
16 सौ पीस ज्वेलरी प्रतिदिन की क्षमता।
इनको है छूट
बीआइएस के नियमों के अनुसार जिन कारोबारियों का सालाना कारोबार 40 लाख रुपए से कम है, उन्हें पंजीयन करवाना अनिवार्य नहीं है। इसी प्रकार वे हॉलमार्क ज्वेलरी नहीं बेच सकेंगे। वे परंपरागत ज्वेलरी का कारोबार कर सकते हैं। इसमें शुद्धता की गारंटी ग्राहक और दुकानदार के बीच हुए आपसी विश्वास के व्यापार पर आधारित रहता है।
कारोबारी हट रहे पीछे
कुछ ज्वेलर्स ने बताया कि जांच में यदि ज्वेलरी में कुछ गड़बड़ी मिलती है तो उसका जिम्मेदार सीधे रूप में दुकानदार को ठहराया जाता है। जबकि उसे तैयार करने वाले कारीगर दूसरे होते हैं। वहीं प्रमाणिकता के चिन्ह लगाने का हॉलमार्क सेंटर में होता है। लेकिन प्रारंभिक तौर पर जिम्मेदार विक्रेता होता है। जांच के दौरान सभी पक्षों से पूछताछ से लेकर प्रमाण जुटाए जाते हैं, तब तक माल जब्त रहता है। वहीं कारोबार भी प्रभावित रहता है।
सत्यापित नहीं थे बांट
शहर में ज्वेलरी की दुकानों की जांच में नापतौल विभाग को 25 कारोबारियों के यहां पर अनियमितता मिली हैं। इनके खिलाफ धारा 24/33 और 19/7 के अंतर्गत नोटिस भेजे गए हैं। जांच में पाया गया कि ज्वेलरी के नापतौल संबंधी उपकरण सत्यापित नहीं थे। इसी प्रकार सत्यापित बांट भी नहीं मिला।
Published on:
30 Nov 2022 05:02 pm
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