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High court News : हाईकोर्ट ने अमलतास मेडिकल कॉलेज के खिलाफ निरस्त की याचिका

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मत के साथ अमलतास मेडिकल कॉलेज देवास की छात्रा की याचिका निरस्त कर दी कि कॉलेज की ओर से दिए गए गलत प्रवेश के लिए यूनिवर्सिटी जिम्मेदार नहीं है।

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Mp High Court Jabalpur

Mp High Court Jabalpur

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मत के साथ अमलतास मेडिकल कॉलेज देवास की छात्रा की याचिका निरस्त कर दी कि कॉलेज की ओर से दिए गए गलत प्रवेश के लिए यूनिवर्सिटी जिम्मेदार नहीं है। जस्टिस सुजय पॉल व जस्टिस डीडी बंसल की डिवीजन बेंच ने कहा कि मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी ने इसीलिए प्रवेश-पत्र जारी नहीं किया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता छात्रा अपने दो वर्ष खराब होने के लिए कॉलेज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को स्वतंत्र है।

धामनोद, धार निवासी श्रुति पाटीदार की ओर से यह याचिका दायर की गई। कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने नीट (यूजी) परीक्षा 2019 में सफल होकर 362 अंक प्राप्त किए। उसे द्वितीय राउंड की काउंसिङ्क्षलग में देवास के अमलतास इंस्टिट््यूट ऑफ मेडिकल साइंस की ओबीसी वर्ग की एमबीबीएस सीट आवंटित की गई। लेकिन प्रवेश के समय कॉलेज में उसे एक एसटी छात्रा सृष्टि ठाकुर की छोड़ी हुई सीट दी गई। उसका अध्ययन जारी रहा। वर्षांत में परीक्षा के लिए उसके अन्य सहपाठियों के प्रवेशपत्र आ गए, लेकिन उसे प्रवेश पत्र नहीं मिला। पत्राचार पर जानकारी हुई कि डीएमई (चिकित्सा शिक्षा संचालक) ने उसके प्रवेश का अनुमोदन ही नहीं किया था। इसी के खिलाफ यह याचिका दायर की गई।

अमलतास कॉलेज की ओर से अधिवक्ता पारितोष गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने इस सम्बंध में शपथपत्र दाखिल किया था कि डीएमई के अनुमोदन तक उसका प्रवेश स्थायी रहेगा। लिहाजा, इसमें कॉलेज की कोई गलती नहीं। वहीं राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता जाह्नवी पण्डित ने तर्क दिया कि कॉलेज ने गलत सीट पर प्रवेश दिया, इसलिए डीएमई ने अनुमोदन नहीं किया। इसी वजह से मेडिकल यूनिवर्सिटी ने प्रवेशपत्र जारी नहीं किए।