
MP Power Companies to Transfer Subsidy to Customers Bank Account
जबलपुर। हाईकोर्ट ने पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी व उसकी ठेकेदार कंपनी फेडको पर अनाप-शनाप बिलिंग का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका को गंभीरता से लिया है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार व विद्युत वितरण कंपनी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
बिजली बिल ने बिगाड़ा बजट
जबलपुर निवासी और जय रेवाखंड संगठन के पदाधिकारी सुबोध गौतम ने यह जनहित याचिका दायर की है इसमें कहा गया है कि पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अपने उपभोक्ताओं की मीटर रीडिंग और स्पॉट बिलिंग का ठेका फेडको नामक एक निजी कंपनी को दे दिया है। यह कंपनी नियमों के विरुद्ध बिलिंग कर उपभोक्ताओं से अनाप-शनाप बिजली बिल वसूल रही है। फेडको की कार्यप्रणाली और मशीनों में गड़बड़ी है। फेडको जिस सीसीएन सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है, उसमें पिछले चुकता बिल को घटाने की व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते लगातार बड़ी संख्या में बिजली उपभोक्ताओं से बढ़ा चढ़ाकर बिल वसूलने के मामले सामने आ रहे हैं। तगड़े बिजली बिलों ने लोगों के घर का बजट बिगाड़ दिया है। अचानक बिल सामान्य से तीन-चार गुना अधिक आ रहे हैं। खपत पचास यूनिट की हो रही है और बिल पांच सौ यूनिट का आ रहा है। याचिका में आरोप है कि उक्त कंपनी के पास प्रशिक्षित कर्मी नहीं है। इसके अलावा बिजली मीटर को उपभोक्ताओं के घरों के बाहर लगाए जाने पर भी याचिका में आपत्ति जताई गई है।
रीडिंग में देरी से बदल रहा टैरिफ
तर्क दिया गया कि फेडको कंपनी के कर्मचारी विद्युत प्रदाय कोड २००४ के अनुसार प्रतिमाह रीडिंग नहीं करते। जबकि कोड के तहत बिलिंग के लिए लगाया जा रहा टैरिफ हर 30 दिन या 1 माह के लिए होता है। 1 माह से अधिक अवधि में रीडिंग लिए जाने पर बिजली की खपत प्रचालित टैरिफ के अनुसार निर्धारित की गयी खपत से अधिक हो जाती है । ऐसे में कंपनी का बिलिंग सॉफ्टवेयर अधिक बिजली प्रयोग या खपत वाले टैरिफ के आधार पर उपभोक्ता की बिलिंग करता है। मीटर रीडिंग में देरी के चलते उपभोक्ताओं को निर्धारित से अधिक टैरिफ से बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार और विद्युत वितरण कंपनी से अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता प्रशांत अवस्थी, आशीष त्रिवेदी, असीम त्रिवेदी, आनंद शुक्ला, पंकज तिवारी एवं रीतेश शर्मा ने रखा।
एेसे समझिए स्लैब बदलने से बिल में अंतर
पचास यूनिट तक प्रतिमाह बिजली खपत पर बिजली की दर 3.85 रुपए है। 51 से 100 यूनिट तक यह दर 4.70 रुपए, 101 से 300 यूनिट तक 6.00 रुपए और उससे अधिक खपत पर 6.30 रुपए प्रति यूनिट हो जाती है। यदि 30 दिन की बजाय 45 दिन में रीडिंग ली जाएगी, तो जिस उपभोक्ता का प्रतिमाह बिजली खर्च औसतन चालीस यूनिट है, उसकी खपत लगभग 60 यूनिट दर्ज होगी। इसमें 51 से 60 यूनिट प्रतिमाह वाला स्लैब ही लागू होगा। जो कि उपभोक्ता के निर्धारित स्लैब 3.85 रुपए की बजाय 4.70 रुपए है। इसी तरह और अधिक खपत होने पर स्लैब बदलता जाता है और बिल बढ़ता जाता है।
यह है स्थिति
1 से 50 यूनिट तक 3.85 रुपए प्रति यूनिट
51 से 100 यूनिट तक 4.70 रुपए प्रति यूनिट
101 से 300 यूनिट तक 6.00 रुपए प्रति यूनिट
300 यूनिट से ऊपर 6.30 रुपए प्रति यूनिट
Published on:
04 Nov 2017 02:36 pm

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