
Jabalpur High Court
जबलपुर. प्रदेश के निजी स्कूल वर्तमान शैक्षणिक सत्र में गत सत्र की तुलना में दस फीसदी से अधिक फीस वृद्धि नहीं कर सकेंगे। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसते हुए शुक्रवार को अंतरिम आदेश के जरिए यह व्यवस्था दी । एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने इस संबंध में नियम बनाने के संबंध में अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह की मोहलत दे दी।
इस साल नोटिफिकेशन नहीं माना
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे व डॉ.एमए खान की ओर से यह जनहित याचिका दायर कर कहा गया कि प्रदेश के निजी स्कूल मनमानी फीस वृद्धि कर रहे हैं। इसके खिलाफ याचिका पर 2018 में उस वर्ष के लिए 10 फीसदी से अधिक फीस वृद्धि न किए जाने की वैकल्पिक व्यवस्था दे दी । इस पर सरकार ने 2018-19 के लिए दस फीसदी से अधिक वृद्धि न करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। लेकिन मौजूदा शिक्षण-सत्र में वह व्यवस्था प्रभावी न होने के चलते निजी स्कूल संचालक मनमानी फीस वृद्धि कर रहे हैं।
नहीं बने नियम
अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने तर्क दिया हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के पालन में राज्य सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाम लगाने के लिए अधिनियम भी पारित कर दिया। लेकिन एक साल गुजरने के बावजूद भी इस अधिनियम को लागू करने के लिए आवश्यक नियम अब तक नहीं बनाए गए हैं। इसके चलते एक्ट महज कागजी दस्तावेज बन कर रह गया। जब नियमों बना कर लागू नहीं किए जाते, निजी स्कूलों की लूट पर प्रभावी रोक असंभव है। उन्होंने वर्तमान सत्र के लिए कोर्ट से व्यवस्था देने का आग्रह किया। इस पर बेंच ने राज्य सरकार का 2018 का नोटिफिकेशन वर्तमान सत्र के लिए भी बरकरार करते हुए निजी स्कूलों की फीस वृद्धि 10 फीसदी तक नियंत्रित कर दी। राज्य सरकार, स्कूल शिक्षा विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
Published on:
27 Sept 2019 08:06 pm
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