
khajuraho temple
जबलपुर। मप्र की ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल खजुराहो मंदिर की जमीन को लेकर मप्र हाईकोर्ट जबलपुर ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने खजुराहो मन्दिर के समीप चिल्ड्रंस पार्क व पार्किंग के लिए आरक्षित शासकीय भूमि में निर्माण, उसके विक्रय के मसले पर सिविल कोर्ट में मामला दायर करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि सरकारी जमीन के मसले पर भी सिविल कोर्ट में केस दायर किया जा सकता है। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस पीके कौरव की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता देते हुए इस सम्बंध में दायर याचिका का पटाक्षेप कर दिया।
खजुराहो मंदिर की जमीन सरकारी, निर्माण के खिलाफ जा सकते हैं कोर्ट
क्रांतियुग समाज कल्याण समिति, खजुराहो की ओर से याचिका पेश कर वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर दुग्वेकर व अधिवक्ता समरेश कटारे ने कोर्ट को बताया कि राजस्व अधिकारियों की सांठगांठ से खजुराहो स्थिति मंदिरों के पश्चिमी समूह से सटी करोड़ों की शासकीय भूमि क ा निजी नाम मे नामांतरण कर दिया गया है। इस कूटरचना में शामिल पटवारी को सजा हो चुकी है। उसकी अपील तक खारिज हो गई। इसके बावजूद कूटरचना करके बेशकीमती भूमि जिनके नाम पर निजी की गई थी, वर्तमान में भूमि का स्वामित्व उन्हीं के पास है। यदि निजी भूमि को फिर से शासकीय में तब्दील नहीं किया गया तो बच्चों का पार्क व सार्वजनिक पार्किंग की जगह छिन जाएगी। तर्क दिया गया कि जिस जमीन का विवाद है, वह पूर्व में मध्य प्रदेश शासन के स्वामित्व की भूमि थी। लेकिन दस्तावेजों में छेड़छाड़ के जरिये वह निजी कर दी गई। राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा किया गया। मामले की जांच कराने का आग्रह किया गया।
Published on:
05 Jan 2022 04:41 pm
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