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बच्चों ने खोली ढोंगी बाबा की पोल, ठगी से उठाया पर्दा, जानिए पूरा मामला

स्टूडेंट्स ने अंधविश्वास पर कहीं चौंकाने वाली बात

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जबलपुर। किसी बीमारी, डर या दहशत में सहमा हुआ व्यक्ति रूढि़यों में बंधा होने के चलते कई बार अंधविश्वासों के लपेटे में आ जाता है। इन्हीं अंधविश्वासों को दूर करने के लिए विज्ञान जागरुकता अभियान का ब्लॉक लेवल कॉम्पीटिशन संपन्न हुआ। जिसमें विकासखंडों से आए 9 स्कूलों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। तीन विधाआें में संपन्न हुए इस अभियान का आयोजन मॉडल हाई स्कूल में हुआ। जहां मुख्य रूप से डीईओ एनके चौकसे, डीपीसी अजय कुमार दुबे, प्राचार्य वीणा वाजपेयी, उपमा गुप्ता, आलेखा तिवारी, आरती तिवारी की उपस्थिति रही। बच्चों ने बाबाओं द्वारा किए जाने वाले तथाकथित चमत्कारों का वास्तविक प्रदर्शन किया। जिसमें विशेष रूप से पानी में आग लगाना, नींबू से खून निकालना, सूखी लकडि़यों और पत्तियों में आग लगना, पीलिया झाडऩा जैसे कारनामे शामिल रहे।

इन स्कूलों ने लिया हिस्सा
अवधारणा प्रदर्शन, नाटिका और क्विज में घुंसौर, आमाहिनौता, कन्या शाला बरगी, बालक शाला बरेला, कमला नेहरू, मॉडल स्कूल, गोकलपुर, कटियाघाट और भेड़ाघाट स्कूलों के बच्चों ने हिस्सा लिया। यह सभी ब"ो कक्षा 9वीं और 10वीं के छात्र थे। इस दौरान साइंस क्विज भी संपन्न हुआ।

जानिए चमत्कारों का सच :
कोरे कागज पर लिखी कहानी

आमाहिनौता स्कूल से आई अनामिका दुबे ने प्रैक्टिकल के जरिए दिखाया कि एक कागज पर एनएओएच के घोल से कुछ भी लिखा जाए और उस पर फिनाफ्थलीन को स्प्रे किया जाए तो कागज पर गुलाबी रंग में कहानी नजर आने लगती है।

खाली हाथ में सिंदूर का टीका

मॉडल स्कूल के पारितोष गुप्ता ने बताया मरक्यूरी क्लोराइड को हाथ में लगाकर रखा जाए और बाद में पोटेशियम आयोडाइड मिलाया जाए तो यह सिंदूर का रंग ले लेता है। लेकिन यह त्वचा के लिए बेहद हानिकारक होता है।

घी या पानी से आग लगाना

हवनकुंड में सूखी लकडि़यों या पत्तियों में पोटेशियम परमैग्नेंट डाला जाता है। जिसके बाद उसमें ग्लिसरीन, जिसे बाबा लोग घी या पानी बताते हैं, का हवन करते हैं। भारती बर्मन ने बताया क्रिया होने उपरांत इससे आग उत्पन्न हो जाती है।

नींबू से खून निकलना

आकांक्षा त्रिपाठी ने दिखाया कि नींबू में पहले फैरिक क्लोराइड को इंजेक्ट करके रखा जाता है। वहीं जब इसे अमोनियम थायोसाइनाइट लगे चाकू से काटा जाता है तो क्रिया उपरांत लाल रंग उत्पन्न होता है, जिसे खून की संज्ञा दी जाती है।

चूने में पीलिया झाडऩा

सबसे Óयादा कौतूहल इस बीमारी को लेकर था। जिसकी वास्तविकता यह थी कि आम की लकडि़यों में मैंजीफैरान होता है। जो लाइम वॉटर में पाए जाने वाले कैल्शियम हायड्रॉक्साइस से क्रिया कर पीला रंग बनाता है। जिसे पीलिया झाडऩा कहते हैं।

नाटक का लिया सहारा
स्पर्धा में दो नाटक प्रस्तुत किए गए। पहला नाटक गोकलपुर स्कूल द्वारा प्रदर्शित किया गया, जिसमें तरह-तरह के चमत्कार दिखाकर पीलिया झाडऩे के नाम पर बाबा हजारों रुपए एेंठता है। वहीं दूसरा नाटक कटियाघाट की छात्राओं ने भूत उतारने का हवाला देकर आग लगाना, कागज पर भूत द्वारा लिखना जैसे अंधविश्वासों की पोल खोली गई।

ये भी बताया चमत्कार
एल्युमीनियम फॉइल वाली में मरक्यूरिक क्लोराइड का प्रयोग कर निकाली भभूती।
सादे पानी में डुबाया और नमक वाले पानी में तैराया अंडा।
212फैरनहाइट तापमान पर कागज के बिना जले उबाला पानी।