
जबलपुर. प्रदेश में एक डॉक्टर की फीस मात्र 10 रुपए है। इस कारण यहां हर दिन मरीजों की लाइन लगती है, ये फीस भी वे मात्र इसलिए लेते हैं कि जो गरीब व जरूरतमंद व्यक्ति दवा भी नहीं खरीद पाता है, उससे वे फीस तो लेते ही नहीं हैं साथ ही उन्हें दवाईयां भी फ्री में दे देते हैं। उनकी इस मानवता के चलते उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर निवासी डॉ मुनीश्वर चंद्र डावर की, उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से 1967 में एमबीबीएस किया था, इसके बाद वे सेना में भर्ती हो गए थे, वे 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी सेना में थे, इसके बाद उनकी पदस्थापना बांग्लादेश हो गई थी, जहां उन्होंने कई घायलों का इलाज कर उनकी जान बचाई थी, लेकिन युद्ध खत्म होने के बाद उन्होंने स्वास्थ संबंधी परेशानी होने के कारण सेना की नौकरी छोड़ दी थी, इसके बाद उन्होंने जबलपुर में ही मानव सेवा करने की ठानी और खुद का क्लीनिक खोल लिया, फिर क्या था, वे महज 10 रुपए फीस में तब से लेकर आज तक मानव सेवा कर रहे हैं, यही कारण है कि उनके क्लीनिक पर हर दिन 100 से 200 मरीजों की लाइन लगी रहती है।
500 की जगह ले रहे 10 रुपए इसलिए लगती है लाइन
आपको बतादें कि आज के समय किसी भी एमबीबीएस-एमडी की फीस 500 रुपए से कम नहीं है, ऐसे में छोटी मोटी बीमारी या बुखार में मरीज को 500 रुपए की फीस देना अखर जाता है, वहीं दूसरी और कई गरीब, मध्यमवर्गीय व जरूरतमंद लोग यह फीस भी अफोर्ड नहीं कर पाते हैं, ऐसे में वे डॉ मुनीश्वर को दिखाने पहुंच जाते हैं, क्योंकि वे महज 10 रुपए फीस लेते हैं, इस कारण उनके पास दूर-दूर से मरीज पहुंचते हैं, क्योंकि अगर किसी को बुखार या कोई छोटी मोटी बीमारी है तो 10 रुपए फीस और बाहर की दवाई भी खरीदी तो 100-50 रुपए में ही व्यक्ति ठीक हो जाता है, जबकि अन्य किसी एमबीबीएस एमडी के पास जाने पर फीस, दवाई और जांच में ही 2000 रुपए तक खर्च हो जाते हैं।
डॉक्टर मुनीश्वर को मिला पद्मश्री अवार्ड
77 वर्षीय डॉ मुनीश्वर चंद्र डावर को मानव सेवा के चलते पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें साल 2019 में पद्मभूषण अवार्ड के लिए नामांकित किया गया था। डा. डावर ने बताया कि उनका उद्देश्य पैसा कमाना नहीं बल्कि सेवा करना है, इसी कारण वे महज दस रुपए फीस लेते हैं, पहले तो वे मात्र दो रुपए ही फीस लेते थे, लेकिन गरीब व जरूरतमंदों को फ्री में दवाई दे सकें इसलिए वे दस रुपए लेते हैं, ताकि सभी को इलाज की सुविधा मिल सके। उनका कहना है कि मेरा उद्देश्य पैसा कमाना नहीं बल्कि लोगों को स्वस्थ करना है। उन्हें लोगों को स्वस्थ होते देखने में काफी खुशी मिलती है।
Published on:
27 Jan 2023 10:28 am

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