
Railway Central Hospital
जबलपुर। विक्टोरिया अस्पताल में प्रतिदिन 600 मरीज आते हैं। अस्पताल में अक्सर बेड कम पड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को फर्श पर लिटाकर इलाज किया जाता है। अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ने का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल को पांच सौ बिस्तर का बनाने तैयार की गई भवन की डिजाइन अभी भी एनएचएम मुख्यालय भोपाल में स्वीकृति के लिए अटकी हुई है।
सुस्त चाल के चलते विक्टोरिया अस्पताल के भवन की डीपीआर भी नहीं बन पा रही है। विक्टोरिया अस्पताल को पांच सौ बिस्तर वाला अस्पताल बनाने की 14 साल से घोषणाएं हो रही हैं। लेकिन अभी तक न तो अस्पताल के विस्तार के लिए भवन बना और न ही डॉक्टरों की संख्या बढ़ी। अस्पताल में अभी 38 डॉक्टर उपलब्ध हैं, जबकि 68 डॉक्टरों की आवश्यकता है। कोरोना की दोनों लहर के दौरान जिले के अस्पतालों में बेड की कमी हो गई थी।
बनना है 3 मंजिला भवन
जिला अस्पताल की मौजूदा क्षमता तीन सौ बिस्तरों की है। दो सौ पच्चीस नए बेड बढ़ाने के लिए तीस हजार वर्गफीट में तीन मंजिला नए भवन का निर्माण होना है। 49 करोड़ की लागत से बनने वाले इसी भवन की डिजाइन की फाइल फिलहाल एनएचएम मुख्यालय में अटकी हुई है। अस्पताल में नए वार्डों के साथ ही ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू भी बनना है।
जिला अस्पताल में बनने वाले नए भवन की डिजाइन पहले तैयार कर ली गई थी। उसमें कुछ संशोधन के निर्देश मिले थे। संशोधन के बाद डिजाइन एनएचम मुख्यालय भेजी गई है। वहां से स्वीकृति के बाद डीपीआर तैयार होगी। इसके बाद भी आगे का काम हो सकेगा।
- डॉ. संजय मिश्रा, संयुक्त संचालक
कायाकल्प अभियान जारी
स्वास्थ्य विभाग कायाकल्प अभियान चला रहा है। जिसके तहत अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने व चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जिला अस्पताल में कायाकल्प अभियान के नाम पर पुराने भवनों के रंग रोगन का ही काम अब तक हुआ है।
Published on:
24 Aug 2022 11:31 am

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