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नवरात्रि 2019 : इन देवियों की गुप्त आराधना से दुश्मन टेक देंगे घुटने, अमीर बनने की मनोकामना होगी पूरी

देवियों की साधना से भर जाएगा घर द्वार, तंत्र-मंत्र सिद्धि के विशेष योग  

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gupt navratri 2019

gupt navratri 2019

जबलपुर। सनातन धर्म के अनुसार एक हिन्दू वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं। जिनमें दो नवरात्रि चैत्र व शारदेय आमजन मानस के लिए होती हैं। वहीं दो अन्य नवरात्रि, जिन्हें गुप्त नवरात्रि gupt navratri 2019 कहा जाता है साधकों व तंत्र मंत्र सिद्धि के लिए होती हैं। साल हिन्दू संवत्सर 2076 की पहली गुप्त नवरात्रि 3 जुलाई से शुरू हो रही है। ज्योतिषाचार्य पं. जनार्दन शुक्ला के अनुसार इस बार की गुप्त नवरात्रि gupt navratri 2019 में सात दिनों तक विशेष योग बन रहे हैं। जो कि मनोकामना पूर्ति व तंत्र सिद्धि के लिए सबसे श्रेष्ठ माने गए हैं।

रवि व सर्वार्थ सिद्धि योग
ज्योतिषाचार्य पं. सचिनदेव महाराज के अनुसार तंत्र सिद्धि और गुप्त मनोकामनाओं के लिए gupt navratri 2019 गुप्त नवरात्रि अतिमहत्वपूर्ण हैं। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 3 जुलाई से शुरू होकर 10 जुलाई तक रहेंगी। इन नौ दिनों में पांच बार रवि योग बन रहा है, साथ ही दो बार सर्वार्थ सिद्धि योग का विशिष्ट संयोग रहेगा। विशेष संयोग में कर्ज मुक्ति, परिवार में सुख समृद्धि समेत दुश्मनों पर विजय पाने के लिए की गई देवी आराधना सिद्ध की जा सकती है। गुप्त नवरात्रि में कन्या पूजन से परिवार में कलह समाप्त होती है।

इन देवियों का पूजन, तिथियों का होगा क्षय
पं. जनार्दन शुक्ला ने बताया कि इस नवरात्रि में सप्तमी तिथि का क्षय हो रहा है। इससे अष्टमी और नवमीं तिथि एक ही दिन पड़ेगी। गुप्त नवरात्र gupt navratri 2019 में मां कालीतारात्रिपुरसुंदरी भुवनेश्वरी छिन्नमस्तात्रिपुरभैरवीधूमावतीबगलामुखीमातंगी कमला

इसलिए लाभदायी है gupt navratri 2019
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार गुप्त नवरात्र में तंत्र, मंत्र और यंत्र साधना से कई गुना शुभ फल प्राप्त होता है। आषाढ़ मास की नवरात्रि में शिव और शक्ति की उपासना की होती है। गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का श्रेष्ठ समय है। मां भगवती की आराधना दुर्गा सप्तशती से की जाती है।

शुभ और मान्य होती है मानसिक पूजा
gupt navratri 2019 में मानसिक पूजा का महत्व है। माता की आराधना मनोकामनाओं को पूरा करती है। गुप्त नवरात्र में माता की पूजा देर रात में ही की जाती है। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए भक्त को प्रतिपदा के दिन घट स्थापना करना चाहिए। भक्त को सुबह शाम मां दुर्गा की पूजा करना चाहिए। अष्टमी या नवमीं के दिन कन्याओं का पूजन करने के बाद व्रत का उद्यापन करना चाहिए।