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कोरोना के कहर ने किया इतना मजबूर कि बदल गया बहुत कुछ

जबलपुर में भी ऑनलाइन शिक्षा का नया युग, बढ़ीं मेडिकल सुविधाएं      

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जबलपुर। कोरोना के प्रवेश के बाद जबलपुर शहर में भी उतार-चढ़ाव और संक्रमण का भय लोगों ने झेला। अक्टूबर तक संक्रमण की रफ्तार तेज थी। नए साल में फरवरी में राहत मिलते ही सावधानी हट गई। मार्च के दूसरे सप्ताह से कोरोना की रफ्तार फिर बढ़ गई है। कोरोना काल में हर वर्ग प्रभावित हुआ और शहर से लेकर गांव तक में लोगों की जीवन शैली बदली। तकनीक का उपयोग बढ़ा। ऑनलाइन एजुकेशन के साथ वर्क फॉर्म होम का दायरा बढ़ा। अदालतों में वीसी के जरिए सुनवाई की नई राह खुली। कुछ लोगों ने इस आपदा में भी धैर्य नहीं खोया। लेकिन, कई उद्योग धंधों की कमर भी टूट गई। उद्योग बंद होने से बेरोजगारी बढ़ी। लगभग सात माह तक परिवहन के साधन बंद रहे। लॉकडाउन हटने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से अधिकतर लोग अपने साधनों से सफर कर रहे थे। रोजगार की उम्मीद लेकर जो प्रवासी श्रमिक वापस आए थे, उनमें से 70 फीसदी से ज्यादा श्रमिक वापस काम पर लौट गए।
जब-जब कोरोना ने डराया
- 20 मार्च, 2020 : स्विटजरलैंड से लौटा एक शोध छात्र और दुबई से लौटे एक सराफा कारोबारी सहित उसके परिवार के तीन सदस्य कोविड-19 पॉजिटिव मिले।
- 20 अप्रैल, 2020 : चांदनी चौक निवासी एक 62 वर्षीय महिला की कोरोना से मौत हुई। मौत के बाद कोविड जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई।
- 08 जुलाई, 2020 : नगर निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त के यहां 30 जून को हुए विवाह समारोह में शामिल 8 व्यक्ति जांच में कोविड पॉजिटिव पाए गए।
- 26 जुलाई, 2020 : कोरोना पॉजिटिव बिलहरी निवासी योगेन्द्र योगी की प्लाज्मा थैरेपी के लिए भोपाल ले जाने के दौरान रास्ते में मौत।
- 08 अगस्त, 2020 : कोरोना संक्रमित चार बुजुर्गों की मौत। यह कोरोना काल में एक दिन में हुई सबसे ज्यादा मौत है।
- 04 सितंबर, 2020 : सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के दूसरे तल में भर्ती भरतीपुर निवासी 64 वर्षीय कोरोना मरीज ने कूदकर आत्महत्या कर ली।
- 13 सितंबर, 2020 : कोरोना संक्रमित दो डॉक्टर की मौत। एक की शहर के निजी अस्पताल और दूसरे ने भोपाल में इलाज के दौरान दम तोड़ा।
- 20 सितंबर, 2020 : कोरोना की पहली लहर के दौरान एक दिन में सर्वाधिक 251 व्यक्ति कोविड पॉजिटिव मिले।
- 30 सितंबर, 2020 : मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड की प्रभारी रह चुकीं सीनियर स्टाफ नर्स सुनीता की उपचार के दौरान मौत।
- 09 अक्टूबर, 2020 : सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के दूसरे तल से 43 वर्षीय कोरोना संक्रमित ने कूदकर आत्महत्या कर ली।
- 23 दिसंबर, 2020 : यूके में कोरोना के नए स्ट्रेन के मामले मिलने के बाद वहां से 41 लोग जिले में आए। 28 दिसम्बर को लंदन से आई चेरीताल निवासी महिला कोरोना पॉजिटिव मिली।
- 18 मार्च, 2021 : कोरोना के 97 नए मरीज मिले। संक्रमितों की यह संख्या संक्रमण की पहली लहर के बाद सबसे ज्यादा है।

उद्योग बंद, बेरोजगारी बढ़ी
कोरोना काल में लॉक डाउन के दौरान जिले में 10 से ज्यादा बड़े उद्योग बंद हो गए। जिले में 8 हजार से ज्यादा एमएसएमई क्षेत्र की इंडस्ट्री है। अनुमान है कि यहां एक लाख से लोग कार्यरत थे। लॉक डाउन के दौरान जिन कर्मचारियों को हटाया गया था उनमें से 30 फीसदी जिनकी संख्या लगभग 30 हजार है उन्हें वापस काम पर नहीं रखा। वे बेरोजगार हो गए। दूसरे जिलों से लगभग 7 हजार से ज्यादा प्रवासी श्रमिक आए थे उनमें से सरकारी आंकड़ों में मात्र 10 फीसदी को ही स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला। इनमें से लगभग 60 फीसदी वापस भी चले गए। 30 फीसदी बेरोजगार हैं। पहली बार स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत हुई। स्कूलों में डीजी लैप सॉफ्टवेयर तैयार हुआ। टीवी के माध्यम से शिक्षा दी गई। मोहल्ला क्लास का कांसेप्ट विकसित किया गया। सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से पढ़ाई हुई। विवि व कॉलेजों में लेक्चर ऑनलाइन हुए। कॉलेज छात्रों ने पहली बार ओपन एग्जाम, वर्चुअल मोड पर क्लास लगाई गई। सेमिनार वर्कशॉप वेबीनार में बदल गए।

अदालतें हुई हाईटेक, वीसी से सुनवाई
न्यायपालिका की कार्यप्रणाली में भी खासे बदलाव हुए हैं। हाईकोर्ट से लेकर जिला अदालतों में वीसी के जरिए सुनवाई आरम्भ हुई। केस दायर करने के लिए भी ई फाइलिंग की व्यवस्था भी की गई। कोरोनाकाल के दौरान न्यायिक प्रक्रिया के लिए अपनाई गई तकनीक ने न्यायपालिका के समक्ष वैकल्पिक रूप से सुनवाई की राह खोल दी। 24 मार्च, 2020 को लाकडाउन के साथ ही जिला और कुटुंब अदालतों में भौतिक सुनवाई बंद कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने जिला और कुटुंब अदालतों में 18 जनवरी से नियमित भौतिक सुनवाई करने का आदेश जारी किया। उधर, हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और इंदौर व ग्वालियर खंडपीठों में पूरे 335 दिनों बाद 15 फरवरी से भौतिक सुनवाई आरम्भ की गई।