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MP: कैशलेस दूर की कौड़ी, यहां 26 गांव, 60 हजार पर सिर्फ एक बैंक

सरकार नोटबंदी के बाद कैशलेस की बात कर रही है। जिले में कई गांव ऐसे हैं जहां लोग बैंकिंग सुविधाओं के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।

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Abha Sen

Dec 24, 2016

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ज्ञानी रजक@जबलपुर। सरकार नोटबंदी के बाद कैशलेस की बात कर रही है। जिले में कई गांव ऐसे हैं जहां लोग बैंकिंग सुविधाओं के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। शहर से 36 किमी दूर ग्राम धनपुरी में भी यही स्थिति है। 26 गांवों के लिए के लिए यहां एक बैंक शाखा है। जिसमें ग्राहकों की संख्या 9 हजार से ज्यादा है। एेसे में लोगों के लिए लेनदेन कष्टदायक होता है। निवास रोड पर स्थित गांव में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की एक शाखा है।

नोटबंदी के बाद से सुबह से लेकर शाम तक 100 से 150 ग्राहक लाइन में दिखाई देना कोई बड़ी बात नहीं। वजह, 10 से 15 किमी की दूरी तक कोई दूसरा बैंक नहीं है। बैंक के 40 फीसदी ग्राहकों के पास एटीएम कार्ड नहीं है। जिनके पास है उनमें से ज्यादातर इसका उपयोग करना ही नहीं जानते। मुसीबत यही खत्म नही होती। इतने गांवों के बीच एक ही बैंक और एक ही एटीएम है। वह भी नोटबंदी के बाद से बंद है।

उप तहसील बरेला से करीब 14 किलोमीटर दूर इस गांव की एकमात्र बैंक शाखा पर भारी दबाव रहता है। क्योंकि बैंक की यह शाखा बहुत छोटी है। यहां ब्रांच मैनेजर से लेकर स्टाफ तक की संख्या 5 है।


नोटबंदी के बाद और बढ़ गई परेशानियां
नोटबंदी के बाद इनकी कठिनाइयां बढ़ गई हैं। क्षेत्र के लोग राशि निकालने आते हैं तो उन्हें जरुरत के मुताबिक राशि नही मिलती। बीजापुरी निवासी छोटी बाई, मेहगांव के बलराम साहू और धनपुरी के ही मोहन पटेल ने बताया कि सुबह से दोपहर तक लाइन में खडे़ रहो। जिन्हें पैसा मिल जाए वह भाग्यशाली रहते हैं।

यह गांव शामिल
धनपुरी, डुड़ी, बीजापुरी, पहाड़ीखेड़ा, उमरिया, कुड़ारी, मेहगांव, कुटेली, मलारा, बमनी, पड़वार, पर्तला, पिपरिया, महगवां, सिहोरा, गाडऱखेरा, तिलहरी, सिलपुरी, बिलगड़ा, टिकरा टोला और डूंगा सहित अन्य गांव। धनपुरी से 3 किमी दूर मलारा के रामदास विश्वकर्मा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सुविधा नहीं हैं। बैंकिंग के लिए धनपुरी ही जाना पड़ता है। उनका सुझाव था कि कैशलेस योजना तभी सफल हो सकती है जब इसके व्यापक इंतजाम हों।

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