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यहां है शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने की खुली आजादी

शादी से पहले कई रातें में साथ में गुजारते हैं लड़के-लड़कियां, बाद में परिजनों के सामने रखते हैं शादी का प्रस्ताव

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jabalpur

जबलपुर। शादी से पहले सेक्स..? यह शब्द सुनकर ही लोग कह देंगे कि ये तो सरासर गलत और मर्यादा के विपरीत है.., लेकिन हम बता रहे हैं एक सच्ची स्टोरी, जहां शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाना एक रिवाज या परम्परा का हिस्सा है। इसे बुरा नहीं मााना जाता। यह परम्परा डिंडौरी जिले के बैगा चक क्षेत्र में आज भी कायम है। बैगा चक के चामू गांव से आए रूपलाल ने बताया कि उनके यहां शादी से पहले लड़के और लड़की को शारीरिक संबंध बनाने की खुली छूट है। इसके बाद दोनों की शादी होती है। चामू ने कुछ और रोचक बातें साझा की हैं। वनांचलों में सदियों से जारी परम्पराओं की जानकारी देने के लिहाज से इन बातों को हम आप तक भी पहुंचा रहे हैं।

मुस्कुराहट ने खोला ये राज
चामू निवासी रूपलाल बैगा (24 वर्ष) यहां माढ़ोताल झुग्गी बस्ती में रहकर मजदूरी कर रहे अपने गांव के ही शमनू ठाकुर के यहां रुके हुए हैं। उनके साथ उनकी पत्नी रेखा भी है। एक सवाल पर रुपलाल ने शरमाते और मुस्कुराते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने भी शादी से पहले रेखा के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। रूपलाल ने कहा कि यह तो हमारे यहां का रिवाज है। बैगा चक में अधिकांश लड़के-लड़कियां यही करते हैं। इसे बुरा नहीं माना जाता, क्योंकि इसके बाद ही दोनों की शादी हो जाती है।


लिव-इन-रिलेशनशिप
रूपलाल के साथ ने बताया कि सन् 2014 में वे रेखा के साथ बैसाख की किसानी का काम कराने के लिए जबलपुर के जुनवानी गांव आए थे। रेखा और गांव के काफी लोग उनके साथ थे। खेतों में कटाई के दौरान ही उनके व रेखा के बीच आकर्षण बढ़ा। इसके बाद दोनों साथ-साथ रहने लगे। कुछ रातें साथ बिताने के बाद उन्होंने अपने परिवार वालों के सामने शादी की बात रखी। परम्परा के मुताबिक उसे मंजूर कर लिया गया और 2015 में धूमधाम से दोनों की शादी हो गई। रूपलाल ने बताया कि हमारे यहां जिस लड़के को जो लड़की पसंद आती है। उन्हें कुछ दिन एक-दूसरे के साथ रहने की इजाजत मिल जाती है। कुछ दिन साथ में बिताने और एक-दूसरे को करीब से समझने के बाद वे बैगा परम्परा के अनुसार शादी करते हैं।

लड़कियों को प्रमुखता
रूपलाल के साथ शमनू ठाकुर ने भी बताया कि डिंडौरी के कई गांवों में बैगा जनजाति के लोग आज भी पुरानी मान्यताओं को लेकर चल रहे हैं। हर घर में लड़कियों को प्रमुखता दी जाती है। लड़की को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने की आजादी रहती है। वह कुछ दिन अपने प्रेमी के साथ समय भी बिताती है। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से विवाह होता है। शमनू ने बताया कि उनके गांव में लड़कियों और महिलाओं को विशेष प्रमुखता दी जाती है। घर से लेकर बाजार तक के सभी जरूरी काम वही करती हैं। यहां तक कि वे खेतों में बराबरी से हाथ भी बंटाती हैं। ज्यादातपर परिवारों में घर की मुखिया महिलाएं ही होती हैं।

इस तरह पवित्र होती है लड़की
शमनू व रूपलाल का कहना है कि उनके यहां लड़की को सदा पवित्र माना जाता है। लड़की चाहे तो अपनी इच्छा से वह किसी और से दूसरी शादी भी कर सकती है। इसके लिए उसे पवित्रता की एक रस्म से होकर गुजरना पड़ता है। यदि कोई विवाहित लड़की अपनी मर्जी से किसी दूसरे युवक से विवाह करना चाहती है। दोनों के परिजन तैयार हैं तो सबसे पहले लड़की के ऊपर गरम पानी डाला जाता है। ऐसा माना जाता है कि गर्म पानी से नहाने व शरीर को धोने के बाद लड़की पवित्र हो जाती है। इस रस्म के बाद वह दूसरी शादी रचाती है।


खुद बताती हैं अपनी पसंद
रूपलाल की मानें तो बैगा समाज में लड़कियां मन ही मन किसी युवक को अपना जीवनसाथी चुन लेती हैं। इसके बाद वे अपने मन की बात परिवार के लोगों को बताती हैं। इसके बाद आपसी सहमति से दोनों को साथ रहने का मौका दिया जाता है, ताकि वे एक दूसरे को करीब से जान और समझ सकें। कुछ दिन के बाद मुहूर्त निकालकर दोनों का विवाह कर दिया जाता है।

विधवा का विवाह
रूपलाल ने बताया कि बैगा समाज में विधवा महिला को दूसरा विवाह करने का पूरा अधिकार है। यदि पति का निधन हो जाता है तो सबसे पहले शादी के लिए देवर का नाम आगे किया जाता है। यदि महिला को देवर पसंद है तो वह उसके नाम की चूडिय़ां पहन लेती है। यदि उसे देवर के अलावा कोई अन्य युवक पसंद है तो वह समाज के सामने अपनी बात रखती है। युवक की सहमति मिलने पर वह उससे विवाह करके उसके नाम की चूडिय़ां पहनती है। उसे सभी के सामने अपना पति मान लेती है। यह रस्म पूरे धूमधाम से निभाई जाती है। इसके बाद युवक बिना किसी शिकवा-शिकायत के पत्नी की तरह उसे अपने साथ रखता है।

दुल्हन ही दहेज
रूपलाल ने बताया कि उनके समाज में दहेज की प्रथा नहीं है। बारातियों का रीति-रिवाज से स्वागत ही पर्याप्त माना जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि बारात में शराब परोसना अनिवार्य रहता है। लड़की के पक्ष के लोग विदाई में जो भी उपहार देते हैं, उसे खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया जाता है। यूं समझ लीजिए कि बैगा जनजाति में दूल्हे के लिए दुल्हन ही दहेज है। शादी के बाद पति-पत्नी खेतों में बराबरी से मेहनत करते हैं। खेती नहीं है तो दोनों मेहनत मजदूरी करके अपना व परिवार का उदर पोषण करते हुए खुशी-खुशी जीवन बिताते हैं।