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ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट मे छोड़ दी कैंची, डॉ चुकाएं हरजाना

रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय(एल्गिन अस्पताल) की डॉ नीरजा दुबे ने ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में कैंची छोड़ दी। जिला उपभोक्ता आयोग ने इस कृत्य के लिए राज्य सरकार, जबलपुर सीएमएचओ, एल्गिन अस्पताल व डॉ नीरजा दुबे को घोर लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया। कोर्ट ने आदेश दिए कि राज्य सरकार व अन्य उत्तरवादी मिलकर पीड़ित महिला को ब्याज सहित 5 लाख रु व डॉ नीरजा दुबे 1 लाख रु हरजाना प्रदान करें। केस खर्च के लिए उसे 5 हजार रु भी दिए जाएं।

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Court News

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जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग, सीएमएचओ व एल्गिन हॉस्पिटल को भी जिम्मेदार ठहराया
जबलपुर।

रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय(एल्गिन अस्पताल) की डॉ नीरजा दुबे ने ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में कैंची छोड़ दी। जिला उपभोक्ता आयोग ने इस कृत्य के लिए राज्य सरकार, जबलपुर सीएमएचओ, एल्गिन अस्पताल व डॉ नीरजा दुबे को घोर लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया। कोर्ट ने आदेश दिए कि राज्य सरकार व अन्य उत्तरवादी मिलकर पीड़ित महिला को ब्याज सहित 5 लाख रु व डॉ नीरजा दुबे 1 लाख रु हरजाना प्रदान करें। केस खर्च के लिए उसे 5 हजार रु भी दिए जाएं।

भोपाल में निकाली गई कैंची-
अमखेरा, आधारताल निवासी महिला मंजू कुशवाहा की ओर से उपभोक्ता आयोग में यह परिवाद दायर किया गया। कोर्ट को बताया गया कि 6 सितंबर 2009 को एल्गिन अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ नीरजा दुबे ने सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए उनकी डिलीवरी कराई।डिलीवरी के बाद से ही उसे पेट मे दर्द रहने लगा। उसने डॉ नीरजा दुबे को फिर दिखाया तो उन्होंने सामान्य दवाएं दे दीं। इनसे कोई फायदा नहीं हुआ। दर्द बढ़ने आवेदिका ने भोपाल जाकर एक निजी अस्पताल में चेकअप कराया। तब पता चला कि सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान उसके पेट मे डॉ नीरजा दुबे ने कैंची छोड़ दी थी। यह कैंची महिला के पेट से निकालकर उसकी जान बचाई गई।

कोर्ट ने सेवा में कमी माना-
परिवाद में डॉ दुबे व एल्गिन अस्पताल की इस लापरवाही को सेवा में कमी बताते हुए हरजाना दिलाने की मांग की गई। सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव, सदस्यद्वय सुषमा पटेल व अमित सिंह तिवारी की कोर्ट ने कहा कि सेवक या कर्मचारी के कार्य के लिए नियोक्ता भी उत्तरदायी होता है। कोर्ट ने डॉ नीरजा दुबे , एल्गिन अस्पताल, सीएमएचओ व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य विभाग को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत सेवा में कमी का दोषी पाया।