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मानवता शर्मसार: 32 घंटे तक जवान बेटे का पोस्टमार्टम कराने भटकते रहे परिजन

पुलिस, प्रशासन और मेडिकल स्टाफ तक में नहीं हुई सुनवाई  

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Shame on humanity

Shame on humanity

जबलपुर . मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया। एक मृतक का शव 32 घंटे तक पोस्टमार्टम नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करता रहा। परिजन की फरियाद सिस्टम ने नहीं सुनी। सेंट्रल जेल में कैद मंडला निवासी हेमंत कौशिक की मौत के बाद शव का सोमवार को पोस्टमार्टम हुआ। तीसरे दिन मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में परिजन के बयान लिए गए, शव सौंपा गया।

रविवार को सुबह पीएम का दिया था आश्वासन
हेमंत की मौसी भावना व मौसा तारन का आरोप है कि उन्हें शव के लिए लगातार भटकाया गया। शनिवार को कहा गया था कि रविवार को सुबह 9 बजे मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पीएम होगा। फिर दोपहर 12 बजे और फिर 2 बजे का समय दिया गया। लेकिन पूर दिन पीएम नहीं हुआ।

ये है प्रोटोकॉल
सेंट्रल जेल जबलपुर के पूर्व जेलर गोपाल ताम्रकार के अनुसार कैदी की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने पर अस्पताल स्टाफ को पुलिस थाने में सूचित करना होता है। पुलिस एसडीएम, तहसीलदार को सूचित करेगी। एसडीएम या तहसीलदार जेएमएफसी को सूचित करते है ताकि मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव का पीएम करके परिजन के सुपुर्द किया जा सके।

नहीं उठाए फोन
शव नहीं मिल पाने को लेकर परिजन प्रशासनिक अधिकारियों को फोन लगाते रहे, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया। अधिकारियों ने बाद में कहा कि साप्ताहिक समय सीमा बैठक में होने के कारण वे बात नहीं कर सके।

अस्पताल पहुंचने पर मौत का पता चला
तारन चंद्रवंशी ने बताया की हेमंत को चेक बाउंस के मामले 21 जून 2023 को गिरफ्तार किया गया। 27 जून को मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया। 22 जुलाई को लोक अदालत में सुनवाई हुई, 5 लाख में समझौता हो गया। 2.50 लाख रुपये आरटीजीएस और बाकी चेक से दिए गए। शाम 7 बजे मामला कोर्ट ने खारिज कर दिया। जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो पता लगा की शाम 6.30 बजे ही हेमंत की इलाज के दौरान मौत हो गई है।


मामले की कोई सूचना नहीं थी, कैदी की मौत होने की स्थिति में शव का पोस्टमार्टम ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में किया जाता है।
- पंकज मिश्रा, एसडीएम