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मप्र: यहां किसानों ने अपनाई ये तकनीक, कर रहे उन्नत खेती, कमा रहे अच्छा लाभ

मप्र: यहां किसानों ने अपनाई ये तकनीक, कर रहे उन्नत खेती, कमा रहे अच्छा लाभ  

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Soil Health Card Scheme

मनीष गर्ग@जबलपुर। परम्परागत खेती से आगे आकर जिले के किसान खेत की मिट्टी की तासीर के अनुसार फसलों की बोवनी कर रहे हैं। जिले में स्वाइल हेल्थ कार्ड योजना के तहत अभी तक 37 हजार से ज्यादा किसानों ने स्वाइल हेल्थ कार्ड बनवाया है। किसान विकासखंड कृषि अधिकारी के माध्यम से और स्वयं ही मिट्टी का नमूना जांच के लिए अधारताल स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में ला रहे हैं।


37 हजार किसानों ने अब तक बनवाए हैं स्वाइल हेल्थ कार्ड
जिले के ब्लॉक से जांच के लिए लाई जा रही मृदा
जिले के गांवों से भी किसान मृदा परीक्षण के लिए ला रहे नमूने
खेतों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का समुचित प्रबंधन
उर्वरकों को मिट्टी में मिलाने से कम होती है विषाक्तता

अधारताल स्थित सहायक मृदा सर्वेक्षण अधिकारी कार्यालय मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में इन दिनों प्रतिदिन औसतन दो से तीन किसान अपने खेत की मिट्टी लेकर पहुंच रहे हैं। कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से भी किसानों को मृदा परीक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्वाइल हेल्थ कार्ड योजना 2016-17 से प्रारम्भ हुई है। इसके तहत अब तक 36हजार 814 किसानों के खेत के स्वाइल हेल्थ कार्ड बनाए गए हैं। 200 के लगभग नमनूों की जांच भी की जा रही है।

संयुक्त मात्रा की दी जाती है सलाह- मृदा परीक्षण कार्यालय के सहायक भू-सर्वेक्षण अधिकारी एमके वर्मा और कृषि विकास अधिकारी एसके गौतम के अनुसार लैब में मृदा का पीएच, ईसी, ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और सूक्ष्म पोषक तत्व सल्फर, कॉपर, मैगनीज, आयरन एवं ङ्क्षजक की उपलब्ध मात्रा की जांच की जाती है। जांच के बाद किसान को इसकी जानकारी दी जाती है। पोषक तत्वों की उपलब्धता के आधार पर फसल विशेष के लिए रासायनिक खाद, रसायन और जैविक खाद की संयुक्त मात्रा के उपयोग की सलाह दी जाती है। कोरोना काल के दौरान भी लोग जांच के लिए नमूने लेकर आए। वित्तीय वर्ष 2021-22 में 2932 से ज्यादा नमूनों की जांच की गई। फसल के साथ ही बागवानी के पेड़ लगाने के लिए भूमि की अनुकूलता तय करने में भी इस प्रक्रिया से मदद मिलती है।

रसायनों का अनावश्यक उपयोग नहीं
मृदा परीक्षण से खेत की मिट्टी की स्थिति तय हो जाती है। यह भी पता चलता है कि भूमि सुधार के लिए कितनी मात्रा में किस तरह के उर्वरक का उपयोग किया जाए, जिससे उत्पादन अच्छा हो। रसायनों का अनावश्यक उपयोग भी नहीं हो।

यह है फायदा
मिट्टी की जांच से फसल के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का होता है निर्धांरण
मृदा परीक्षण से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम की उपलब्धता
आवश्यतानुसार उर्वरकों के उपयोग की जानकारी।

किसान जागरूक हुए हैं। वे कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से व स्वयं ही मृदा परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में नमूने लेकर आ रहे हैं। वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षित करने के बाद कृषकों को भूमि में उपलब्ध पोषक तत्व व आवश्यक पोषक तत्वों की जानकारी दी जाती है।
- एमके वर्मा, सहायक भू सर्वेक्षण अधिकारी, मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला अधारताल