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महेश्वर में सीवर लाइन का काम कर रही स्पेनिश कम्पनी की बैंक गारंटी जब्त करने पर रोक

हाइकोर्ट ने सरकार को अभ्यावेदन का निराकरण करने का दिया निर्देश    

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hearing by video conference at rajasthan high court

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जबलपुर. खरगोन के महेश्वर में सीवर लाइन के प्रोजेक्ट पर काम कर रही स्पेन की कम्पनी को मप्र हाइकोर्ट से राहत मिली। चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस राजीव कुमार दुबे की डिवीजन बेंच ने कोरोनाकाल में काम न करने की वजह से कम्पनी की 5 करोड़ 27 लाख 26 हजार 397 रुपए की बैंक गारंटी की राशि जब्त करने पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता कम्पनी के साथ बातचीत कर 15 दिनों में इस सम्बंध में उसके अभ्यावेदन का निराकरण कर विधि अनुसार आदेश पारित किया जाए। तब तक बैंक गारंटी को कैश न कराया जाए।

यह है मामला

स्पेन की कम्पनी अबेंजोआ आजुआ के प्रोजेक्ट मैनेजर कार्लोस मोरालेस पेरेज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह के साथ अधिवक्ता सिद्धार्थ गुलाटी, ऐश्वर्या सिंह ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता कम्पनी को खरगोन के महेश्वर में सीवर लाइन व इससे जुड़े कार्यों का ठेका मिला है। नगरीय विकास विभाग के अधीन यह कार्य के लिए वल्र्ड बैंक से मंजूरी है। कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से कम्पनी को अपना काम रोकना पड़ा। लेबर व अन्य समस्याओं के कारण अनलॉक की अवधि में भी काम करना असम्भव है। इस वजह से हुए विलम्ब के चलते नगरीय विकास विभाग ने कम्पनी को तत्काल काम आरम्भ करने का नोटिस दिया। कम्पनी ने अपनी विवशता जाहिर कर फिलहाल काम आरम्भ करने से मना कर दिया। इस पर नगरीय विकास विभाग की ओर से कम्पनी की जमा बैंक गारंटी जब्त कर कैश कराने की चेतावनी स्वरूप फिर नोटिस जारी किया गया। इसी को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि ऐसी आपदा की परिस्थितियों में काम नहीं किया जा सकता। लिहाजा, सरकार को परिस्थितियों के मद्देनजर ठेके की निर्धारित अवधि बढ़ानी चाहिए। लेकिन सरकार ने याचिकाकर्ता कम्पनी के इस सम्बंध में दिए गए अभ्यावेदन पर विचार ही नहीं किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले के गुणदोष पर बिना कोई टिप्पणी किए सरकार को याचिकाकर्ता कम्पनी के अभ्यावेदन पर विधिवत सुनवाई का अवसर देकर उचित आदेश पारित करने का निर्देश दिया। तब तक कम्पनी की जमा बैंक गारंटी जब्त कर कैश कराने पर रोक लगा दी। राज्य सरकार का पक्ष महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव ने रखा।

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