जिले में लगातार बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति

-एनसीआरबी ने 2019 के आंकड़े किए जारी

By: santosh singh

Published: 05 Sep 2020, 12:36 PM IST

जबलपुर। जिले में हर वर्ष आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। वर्ष 2018 की तुलना में 2019 में 23.8 प्रतिशत से अधिक लोगों ने मौत को गले लगा लिया। इसमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में लगभग दो तिहाई है। परिवारिक कलह में लोगों ने सबसे अधिक आत्महत्या करते हैं। इसका खुलासा राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा जारी किए गए आंकड़ें करते हैं। प्रदेश में जहां आत्महत्या के ग्राफ में हर वर्ष 15.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हो रही है। वहीं जबलपुर में लगभग डेढ़ गुना दर से आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
न्यूज फैक्ट-
2018 में आत्महत्या-259
2019 में आत्महत्या-302
वृद्धि-16.6 प्रतिशत
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आत्महत्या की ये वजह-
शादी न होने के तनाव-06
पुरुष-04
महिला-02
शादी शुदा सम्बंधों में तनाव-05
पुरुष-04
महिला-01
शादी से इतर सम्बंध-01
महिला-01
परिवारिक कलह-241
पुरुष-154
महिला-87
ड्रग व नशा के चलते-54
पुरुष-54
प्रेम प्रसंग के चलते-01
महिला-01
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2019 में प्रदेश का ये है आंकड़ा-
एमपी में आत्महत्या-12457
इंदौर में आत्महत्या-618
जबलपुर में आत्महत्या-302
ग्वालियर में आत्महत्या-295
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एनसीआरबी द्वारा जारी आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि नशा की प्रवृत्ति भी आत्महत्या की वजह बन रही है। वर्ष 2019 में ऐसे 54 पुरुषों ने आत्महत्या की, जो किसी न किसी नशे के लती थे। प्रेम सम्बंध, शादी न होने की वजह भी आत्महत्या के कारणों में बताया गया है।
प्रदेश में दूसरे नम्बर पर जबलपुर-
प्रदेश में आत्महत्या करने वालों में जबलपुर दूसरे नम्बर पर है। सबसे अधिक आत्महत्या इंदौर में 618 लोगों ने किया। इसके बाद जबलपुर में 302 लोगों ने आत्महत्या की। तीसरे नम्बर पर ग्वालियर है। यहां 2019 में 295 लोगों ने आत्महत्या की।

Case filed against suicide case
IMAGE CREDIT: patrika

2020 की तस्वीर भी डरावनी-
क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े से इतर एक जनवरी 2020 से 31 अगस्त तक के पुलिस रिकॉर्ड पर नजर दौड़ाए तो तस्वीर इस बार भी डरावनी है। अब तक 288 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। इस बार भी पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक है।
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केस-एक
04 सितम्बर को मेडिकल के सुपर स्पेशलिटी दूसरी मंजिल से कोविड संक्रमित प्रमोद सोनकर (67) ने कूद कर आत्महत्या कर ली। वार्ड में इलाज में हो रही लापरवाही से वह बेहद तनाव में थे।
केस-दो
बच्चा न होने का ताना मारे जाने से व्यथित होकर 35 वर्षीय महिला ने भेड़ाघाट के धुआंधार में छलांग लगाने की कोशिश की। वहां मौजूद आरक्षक हरिओम सिंह ने उसे बचा लिया।
केस-तीन
माढ़ोताल थानांतर्गत कठौंदा गांव निवासी 40 वर्षीय विकलांग सुरेंद्र खंगार ने म्यारी में रस्सी का फंदा लगाकर लटक गया। वह दाहिने पैर से विकलांग था। कोटवार मनोहर दहायत ने सूचना दी।
केस-चार
तिलवारा पुल पर बुधवार देर रात स्कूटी एमपी 20 एसआर 4313 छोडकऱ रांझी निवासी देवेंद्र चौधरी (28) गायब हो गया। तब से उसकी तलाश की जा रही है। स्कूटी में ही उसका मोबाइल मिला।
केस-पांच
हनुमानताल के बाबाटोला निवासी मेघा (18) ने गुरुवार देर रात फंदे से झूल कर आत्महत्या कर ली। छोटी बहन सोनम के साथ कमरे में सोई थी। सुबह चार बजे के लगभग सीढिय़ों के पास दुपट्टे के फंदे से लटकी मिली
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एक्सपर्ट-व्यू
डॉ. सुमित पासी, मनोवैज्ञानिक
आत्महत्या की मनोवृत्ति भी एक बीमारी है। आत्मबल कमजोर होने और एक साथ कई क्षेत्रों जैसे परिवारिक, सामाजिक, व्यक्तिगत और कैरियर का दबाव पडऩे पर अक्सर लोग अवसादग्रस्त होकर ऐसा कदम उठाते हैं। यदि एक महीने से लगातार थकान, सांसों का फूलना, नींद न आना, असमय डायबिटिज और गुस्सा आना और बार-बार मन में आत्महत्या का विचार आ रहा हो तो सावधान हो जायं। ये शरीर में केमिकल डिस बैलेंस का लक्षण है। खुद और परिवार का किसी मनोचिकित्सक से काउंसलिंग कराएं।

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santosh singh Reporting
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