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आइडी तो कहीं अपडेशन नहीं, संकट में छात्र, विवि के काट रहे चक्कर

क्रेडिट के आधार पर छात्र को मिलेगा सर्टिफिकेट, डिप्लोमा अथवा डिग्री  

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जबलपुर। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र छात्राओं को एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) का लाभ दिया जाना है लेकिन कॉलेजों द्वारा इसे लेकर की लापरवाही बरती जा रही है। कॉलेजों द्वारा नई व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय में पंजीयन कराना अनिवार्य किया गया है। साथ ही छात्र-छात्राओं के आईडी नंबर को विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं ताकि छात्रों को आगामी होने वाली परीक्षाओं में इसका लाभ प्रदान किया जा सके लेकिन 50 से अधिक कॉलेजों द्वारा इस संबंध में कोई भी कार्य नहीं किया गया है।

इस तरह करेगा काम

दरअसल यूजीसी ने हर विवि और कॉलेजों को एकेडमिक बैंक में स्टूडेंट का अकाउंट खोलाना अनिवार्य किया गया है। जिसमें छात्रों का पूरा डेटा को स्टोर कर रखा जाएगा। एबीसी से पंजीकृत शिक्षा संस्थाओं के क्रेडिट को छात्र के अकाउंट्स में जमा किया जाएगा। छात्र को सर्टिफिकेट, डिग्री या डिप्लोमा बैंक में जमा हो रहे क्रेडिट के आधार पर मिलेंगे। अगर कोई छात्र किन्ही कारणों से बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ देता है तो उसे संबंधित कोर्स के टाइम पीरियड के हिसाब से सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री दी जाएगी जिससे उसका साल प्रभावित नहीं होगा।

विवि के चक्कर काट रहे छात्र

कॉलेजों की इस गलती के कारण रोजाना बड़ी संख्या में छात्र परेशान होकर विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं। जब छात्र परीक्षा के लिए ऑनलाइन फार्म भरते हैं तो उनसे एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की आईडी मांगी जा रही है। इसके साथ ही जिन छात्रों की आईडी जनरेट की गई है उसे अपडेट न किए जाने के कारण भी समस्या आ रही है। आईडी न होने के कारण आवेदन प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। जबकि कालेजों को स्वयं पोर्टल पर इसका रजिस्ट्रेशन कराना था। इसके उपरांत ही छात्र-छात्राओ को उनके नाम नंबर के आधार पर आईडी आवंटित की जाती है।