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जबलपुर। पेड़ पर पैसे उगने की कहावत अब सच्ची सिद्ध होने जा रही है। क्लाइमेट चेंज समिट पेरिस के समझौते के अनुसार विश्व के १९५ देश न्यू इंटरनेशनल कार्बन मार्केट मैकेनिज्म तैयार कर रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम में वर्ष २०२० में ये समझौते लागू होंगे। जो देश जितना जंगल उगाएगा, उसे उतना ही फायदा होगा। यानि जितने ज्यादा पेड़ लगेंंगे उसी के अनुपात में पैसे भी मिलेंगे।
बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने के लिए पेरिस समझौते में वर्ष २०२० को आधार माना गया है। कार्बन उत्सर्जन कम करने के बदले सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं और सामान्य किसानों को कार्बन क्रेडिट फंड दिया जाएगा। अनुसंधान संस्थानों में इस पर काम शुरू कर दिया है। उष्ण कटिबंधीय संस्थान के वैज्ञानिक निर्धारित क्षेत्रों में लोगों की मौजूदगी से कार्बन उत्सर्जन और पेड़ों से कार्बन अवशोषण की गणना के लिए कार्बन फुट प्रिंट प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। समिट के समझौते के अनुसार ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन स्थिर करने और वैश्विक तापमान में वृद्धि को २ प्रतिशत पर नियंत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्यावरण के लिए १९९७ में बने क्योटो प्रोटोकॉल के सार्थक नहीं होने से इस बार नया कार्बन मार्केट तैयार किया जा रहा है।
वर्ष २०२० से फासिल्स फ्यूल का इस्तेमाल कम करने की शुरुआत करनी होगी। वर्ष २०३० तक कोयले से संचालित बिजली प्लांट, कारखाने बंद करने करने के साथ ही पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करने का लक्ष्य है। सौर उर्जा को बढ़ावा देते हुए मिट्टी की सेहत, जैव विविधता, जल संसाधन और हवा की गुणवत्ता में सुधार के कार्य किए जाएंगे।
टीएफआरआइ, जबलपुर के वैज्ञानिक डॉ. अविनाश जैन के अनुसार कार्बन उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ रहा है। एेसे दौर में हम कुछ न करें तो २१०० तक तापमान में ४.५ से ५ डिग्री वृद्धि का पूर्वानुमान है। राष्ट्रीय बांस मिशन की संवैधानिक समिति सदस्य सुभाष भाटिया के मुताबिक विकासशील देशों को पेड़ो की कटाई में हर साल ३५ प्रतिशत कमी लानी है। २०२० के बाद कार्बन क्रेडिट का पैसा मिलेगा।
Published on:
05 Jun 2018 08:37 am
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