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Jaipur Bird House: बेजुबान परिंदों के लिए अनोखा रियल एस्टेट, जेब से खर्च करके पक्षियों के लिए लगा रहे आशियाने

जयपुर में बढ़ते कंक्रीट के जंगल और घटते पेड़ों के बीच कुछ लोग बेजुबान परिंदों के लिए उम्मीद की नई उड़ान बन रहे हैं। अपनी जेब से खर्च कर ये पक्षी प्रेमी अब तक 50 हजार से अधिक लकड़ी के आशियाने तैयार कर शहरभर में लगा चुके हैं।

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Jaipur Bird House

फोटो: पत्रिका

जयपुर शहर में बढ़ते कंक्रीट के जंगल के बीच बेजुबान परिंदों के लिए एक अनोखा रियल एस्टेट आकार ले रहा है। शहर के कुछ संवेदनशील लोग मिलकर इन परिंदों को गृह-प्रवेश करवा रहे हैं। स्थिति यह है कि ये टोलियां अबतक 50 हजार से अधिक घरौंदे बना चुकी हैं। इनको ये रियल एस्टेट की भाषा में वन बीएचके, टू बीएचके और थ्री बीएचके कहते हैं। इस अभियान से जुड़े लोगों की मानें तो तेजी से कटते पेड़ों और कंक्रीट के जंगल के बीच पक्षियों के सामने सबसे बड़ा संकट अपने अंडों और बच्चों को महफूज रखने का होता है। तिनका-तिनका जोड़कर घोंसला बनाने के इस अंतहीन संघर्ष को देखते हुए लकड़ी के घरौंदे बनाना शुरू किए।

सामान ऐसे करते इकट्ठा

  • ये टीम बेकार पड़े प्लाइवुड को रीसायकल करके बेहद खूबसूरत और सुरक्षित बर्ड हाउस (आशियाने) तैयार कर रही है। इन्हें निजी घरों की दीवारों से लेकर सरकारी इमारतों और सोसायटियों की दीवारों पर भी नि:शुल्क इंस्टॉल किया जा रहा है।
  • जिन घरों और मल्टीस्टोरी में फर्नीचर का काम होता है, वहां जो अनुपयोगी प्लाइवुड सहित अन्य सामग्री बचती है, उसको ले आते हैं और कारीगर नए सिरे से इनको तैयार करते हैं।

मुहिम में जुटे पक्षी मित्र

इस मुहिम से जयपुर शहर में 500 से अधिक पक्षी मित्र जुड़े हुए हैं, जो अपने-अपने स्तर पर पक्षियों के संरक्षण और उनके लिए सुरक्षित आशियाने उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहे हैं। वहीं, 40 से 50 लोगों की एक समर्पित कोर टीम नियमित रूप से इस अभियान का संचालन करती है। यह टीम घरौंदों के निर्माण, उनकी स्थापना, रखरखाव और पक्षियों की जरूरतों के अनुसार डिजाइन में सुधार जैसे कार्यों में लगातार जुटी रहती है। इसी सामूहिक प्रयास के कारण यह पहल लगातार विस्तार पा रही है और हजारों परिंदों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध करा रही है।

जब हमने उड़ने से पहले ही पक्षियों के मासूम बच्चों को नीचे गिरकर मरते देखा, तो इन्हें बचाने की मुहिम शुरू की। हमने पक्षियों के घर बनाकर दीवारों पर लगाना शुरू कर दिया है।
-सूरज सोनी, अध्यक्ष, जन समस्या निवारण मंच

गौरैया की सुरक्षा

ये आशियाने महज लकड़ी के डिब्बे नहीं हैं, बल्कि परिंदों की सहूलियत के हिसाब से लगातार अपडेट होते हैं। टीम पक्षियों के व्यवहार पर नजर रखती है और कोई दिक्कत आने पर डिजाइन बदलती है। पहले इनमें एक शानदार टैरेस लगाई गई थी, लेकिन जब देखा कि उस टैरेस पर बैठकर शिकारी पक्षी गौरैया के बच्चों को निशाना बना रहा है, तो टीम ने तुरंत डिजाइन बदला ताकि बड़े शिकारी पक्षी छोटे परिंदों को परेशान न करें।

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