बंधुआ मजदूरों के पुर्नवास के लिए काम कर रहे संगठन बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने 21 बंधुआ प्रवासी मजदूरों को मानव तस्करी से मुक्त करवाने में सफलता प्राप्त की है। इन मजदूरों को अजमेर में पंचशील नगर स्थित भारत नाम के ईंट भट्टे पर काम करवाने के नाम पर बंधक बना कर रखा गया था, जिसमें 4 महिलाएं, 11 पुरुष और 6 बच्चे शामिल थे।
बंधुआ मुक्ति मोर्चा के जनरल सैक्रेटी निर्मल अग्नि को इस संबंध में सूचना प्राप्त हुई थी। उत्तरप्रदेश के ईंट भटठ एक मजदूर नरेंद्र ने उन्हें इसकी सूचना दी। नरेंद्र ने बताया कि लगभग 3 माह पूर्व ठेकेदार उन्हें उत्तर प्रदेश के बांदा व चित्रकूट से अजमेर लेकर आया था तब से वह यहां भट्टे पर काम कर रहे थे। इन मजदूरों को आवास और पेयजल तक उपलब्ध नहीं करवाया गया साथ ही महिलाओं के साथ भी दुव्र्यवहार किया गया।
मोर्च ने इस संबंध में अजमेर जिला प्रशासन को सूचना दी और प्रशासन के निर्देश पर अजमेर शहर के समीप स्थित भट्टे से बंधुआ मजदूरों को मुक्त करवाने के लिए मानव तस्करी विरोधी यूनिट के अशोक व संगीता चौधरी सहित श्रम विभाग के निरीक्षक और नायाब तहसीलदार तुकाराम संयुक्त टीम बनाई गई। बंधुआ मुक्ति मोर्चा के राजेश यज्ञिक, दिनेश ध्रुव ने गठित टीम को ईंट भट्टे तक पहुंचाया। मुक्त बंधुआ श्रमिकों का कहना था कि वे भट्टे से काम छोड़कर घर लौटना चाहते थे लेकिन भट्टा मालिक एवं ठेकेदार उन्हें घर जाने से रोक रहे थे। यूपी के चित्रकूट और बांदा जिला के अनुसूचित जाति के इन मजदूरों का बयान दर्ज कर मुक्त कराया गया और एसडीएम अवधेश मीणा के समक्ष पेश किया गया। एसडीएम ने बंधुआ श्रम उन्मूलन अधिनियम 1976 के तहत जल्द ही सभी मुक्त बंधुआ श्रमिकों को मुक्ति प्रमाण पत्र प्रदान किए जाने की घोषणा की है । सभी श्रमिकों को रेलवे स्टेशन के समीप स्थित रैन बसेरे में ठहराया गया है। आज सभी मजदूरों को बांदा एवं चित्रकूट के लिए रवाना किया जाएगा।
बंधुआ मजदूरों के उचित पुनर्वास करने की गुजारिश
बंधुआ मुक्ति मोर्चा के जनरल सेक्रेटरी निर्मल अग्नि ने अजमेर जिला प्रशासन को प्रति मज़दूर बीस हजार रुपए के हिसाब से तत्काल सहायता राशि बंधुआ मजदूरों की पुनर्वास योजना 2016 के तहत प्रदान करने एवं पुलिस सुरक्षा के साथ उत्तर प्रदेश उनके पैतृक गांव तक पहुंचाने की अपील की है। साथ ही साथ उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल मुक्त बंधुआ मजदूरों के उचित पुनर्वास करने की गुजारिश की। निर्मल अग्नि ने बताया कि केन्द्र सरकार के पास उचित बजट होने के बाद भी जिला स्तर पर कोरपस फंड नहीं बन पाया है। लगभग 450 से ज्यादा बंधुआ मज़दूर पिछले तीन साल से पुनर्वास की आस लगाए बैठे हैं। आज भी निर्मल अग्नि की कई जनहित याचिकाएं इस विषय को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में विचाराधीन हैं।