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पट्टों की रेवड़ी बांटने के लिए 800 ‘नगर मित्र’ संभालेंगे मोर्चा

राजस्थान में भूखंडधरियों के घर पहुंच आवेदन से लेकर पट्टा तैयार कराने का होगा काम

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पट्टों की रेवड़ी बांटने के लिए 800 'नगर मित्र' संभालेंगे मोर्चा

पट्टों की रेवड़ी बांटने के लिए 800 'नगर मित्र' संभालेंगे मोर्चा

भवनेश गुप्ता
जयपुर। राज्य सरकार ने प्रशासन शहरों के संग अभियान को हर स्तर पर सफल बनाने के लिए अब अपने साथ 'नगर मित्र' जोड़ लिए हैं। प्रदेश में करीब 800 नगर मित्र बनाए गए हैं, जो पट्टों की रेवड़ी बांटने में सहयोग करेंगे। ये लोगों के घर पहुंचकर पट्टे के लिए आवेदन भराने से लेकर तैयार कराने तक का पूरा काम करेंगे। यह प्रक्रिया (डोर स्टेप पहुंचने तक) दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए नि:शुल्क होगी, लेकिन बाकी भूखंडधारियों से 'सेवा शुल्क' लिया जाएगा। खास यह है कि अभियान अवधि के बाद भी ये नगर मित्रों को नगरीय निकायों में काम करने के लिए अधिकृत कर दिया गया है, लेकिन इसके लिए पंजीयन शुल्क की 10 प्रतिशत राशि हर साल जमा करानी होगी। प्रदेश के ज्यादातर शहरों में नगर मित्र होंगे। नगर नियोजन विभाग ने यह तैयार किया है। गौरतलब है कि राज्य सरकार अभियान के जरिए 10 लाख पट्टों की रेवड़ी बांटकर करीब पांच हजार करोड़ का राजस्व जुटाने चाह रही है।

10 से 1.50 लाख रुपए तक शुल्क
इसके तहत नगर मित्र 10 रुपए प्रति वर्गमीटर से लेकर 1.50 लाख रुपए तक शुल्क लेंगे। इसमें कॉलोनी के लेआउट प्लान तैयार करने से लेकर भवन मानचित्र अनुमोदन तक का काम शामिल है। हालांकि, भूखंडधारियों के लिए स्वयं के स्तर पर प्रक्रिया पूरी कर आवेदन जमा कराने का विकल्प भी होगा।

शिकायत पर ब्लैक लिस्ट होंगे
सरकार अभियान के दौरान इतनी छूट दे रही है कि नगर मित्र भी इसका गलत फायदा उठा सकते हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए तत्काल ब्लेक लिस्ट करने का प्रावधान किया गया है। काम में अनावश्यक देरी, उदासीनता मिली तो उसे हटाया जा सकेगा।

संभागवार नगर मित्र
जयपुर संभाग— 239
जोधपुर संभाग— 157
अजमेर संभाग— 236
बीकानेर संभाग— 146
कोटा संभाग— 151
उदयपुर संभाग— 100
एनसीआर (अलवर व भरतपुर)— 116
(इसमें एक फर्म या व्यक्तिगत नगर मित्र कई शहरों में पंजीयन कराया है, इसलिए इस सूची में संख्या अधिक अंकित है)

नगर मित्र का यह होगा काम
-लोगों को ऑनलाइन आवेदन भरवाने में तकनीकी मदद करेंगे
-सुनिश्चित करेंगे कि आवेदन में दस्तावेज या अन्य किसी तरह की कमी तो नहीं रह गई
-आवेदनों के निस्तारण में संबंधित निकाय को भी निर्धारित शुल्क पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएंगे।
-गैर अनुमोदित कॉलोनियों का ले-आउट प्लान तैयार करना।
-90ए की कार्यवाही कर पट्टे तैयार करने में सहयोग देना
-मास्टर प्लान,जोनल प्लान,सेक्टर प्लान के अनुरूप भूउपयोग परिवर्तन का सुपर इंपोजिशन और इससे जुड़ी कार्यवाही के लिए पत्रावली तैयार करना
-आबादी भूमि के नियमन के लिए भूमि अधिकार के समर्पण की कार्यवाही, खांचा भूमि आवंटन।
-भूखंड का उप विभाजन एवं पुनर्गठन और भवन मानचित्र अनुमोदन
(इन कार्यों के आधार पर आवेदक से शुल्क निर्धारित किया है)

नगर मित्र के जरिए यह शुल्क तय किया
-कॉलोनी का लेआउट प्लान तैयार करने और उसे निकाय में प्रस्तुत किए जाने तक— 50 हजार से 1.50 लाख रुपए
-एकल भूखंड योजना का पट्टा लेने के लिए पत्रावली तैयार कर उसे निकाय में सौंपने के लिए— 10 रुपए प्रति वर्गमीटर (अधिकतम 1500 रुपए)
-कॉलोनी के भूखंड के पट्टे के लिए पत्रावली तैयार कर निकाय में प्रस्तुत करना— 750 से 3000 रुपए (भूखंड के आकार के अनुसार)
-अनुमोदित कॉलोनियों के लेआउट प्लान को जीआईएस आधारित बेस मैप पर सुपर इम्पोज़ करना— 15 से 30 हजार रुपए
-पुरानी आबादी इलाके में पट्टे के लिए पत्रावली तैयार कर निकाय में प्रस्तुत करना— 2500 से 5000 रुपए तक
-खांचा भूमि आवंटन के मामले में— 750 रुपए
-पुनर्गठन व उप विभाजन— 1500 से 2500 रुपए
-भूउपयोग परिवर्तन से जुड़े मामले— 25 से 40 हजार रुपए
-भवन मानचित्र अनुमोदन— 2500 से 7500 रुपए
-भवन मानचित्र अनुमोदन (750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल के भूखंड)— 10 प्रति वर्ग मीटर


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