
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी (Oldest Political Party of India) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) में यूं तो असंतोष और बगावत का सिलसिला पुराना है लेकिन 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद से नेताओं का पार्टी छोड़ने का सिलसिला तेज हुआ है। इसका कारण कांग्रेस पर गांधी परिवार की पकड़ का कमजोर होना माना जा रहा है।
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा का विस्तार हुआ तो अधिकांश कांग्रेस नेता हाथ का साथ छोड़कर भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। एक बार तो राजस्थान के उप मुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट भी पार्टी छोड़ने का मन बना ही चुके थे। जिस बात पर आज अशोक गहलोत की पूरी बगावत टिकी हुई है। पिछले आठ साल में नौ पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस से किनारा कर चुके हैं।
खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश मुख्यमंत्रियों ने भाजपा का दामन थामना ही उचित समझा। पिछले महीने ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे गुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस से किनारा कर अपनी नई पार्टी का गठन किया। आजाद कांग्रेस के उस ग्रुप 23 का हिस्सा रहे हैं, जो कांग्रेस आलाकमान पर सवाल उठाता रहा है।
पिछले साल अक्टूबर में लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर अपनी पार्टी बनाई थी। हाल में उन्होंने अपनी इस पार्टी का भाजपा से विलय कर लिया।
कांग्रेस का दामन छोड़, भाजपा में शामिल
कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे एस. एम. कृष्णा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे नारायण राणे, गुजरात के मुख्यमंत्री रहे शंकर सिंह वाघेला 2017 में कांग्रेस का साथ छोड़कर बाहर निकल गए। इनमें से कृष्णा और राणे भाजपा में शामिल हुए। इसके अलावा एक दिन के लिए उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे जगदंबिका पाल, गोवा के मुख्यमंत्री रहे लुई जिन्हों फ्लेरियो, मणिपुर के मुख्यमंत्री रहे एन. बीरेन सिंह तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा भी कांग्रेस का दामन छोड़ चुके हैं।
Published on:
27 Sept 2022 04:07 pm
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