
91 विधायकों ने नहीं दिए थे स्पीकर को इस्तीफे
जयपुर। राजस्थान में कांग्रेस विधायकों के इस्तीफों को लेकर बड़ी खबर है। पिछले करीब 110 दिन से 91 विधायकों के इस्तीफे की बात कही जा रही थी। लेकिन, अब यह आंकड़ा 81 पर आ चुका है। राजस्थान हाईकोर्ट में महाधिवक्ता ने विधानसभा सचिव की ओर से जवाब पेश किया। साथ ही जवाब की प्रति उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को भी दी गई। जिसमें कहा गया है कि 91 इस्तीफ़े कभी दिए ही नहीं गए। वास्तव में 81 विधायकों की ओर से इस्तीफे दिए गए थे। जिनमें से 5 फोटो कॉपी थे और 6 विधायकों ने ये सभी 81 विधायकों के इस्तीफ़े सौंपे थे। इन सभी विधायकों ने स्वयं स्पीकर के समक्ष उपस्थित होकर अपने—अपने इस्तीफ़े वापिस लेने के पत्र प्रस्तुत कर दिए है।
विधानसभा प्रक्रिया नियम 174(4) का हवाला देते हुए सचिव विधानसभा की ओर से कहा गया है कि इस्तीफा स्वीकार होने से पहले सदस्य इस्तीफ़ा वापिस ले सकता है। यह इस्तीफ़े स्वीकार होने से पहले ही वापिस लिए जा चुके है। इसलिए ये कानून की दृष्टि में शून्य हो चुके है। जिससे याचिका सारहीन हो गई है।
बता दें कि राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस विधायकों के स्पीकर सीपी जोशी को इस्तीफे सौंपने के मामले में दायर जनहित याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। यह सुनवाई न्यायाधीश एम.एम. श्रीवास्तव व जस्टिस सीके सोनगरा की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान पक्षकार के रूप में स्वयं पैरवी करते हुए उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि सत्तारुढ़ दल के 91 विधायकों के त्याग पत्र दिए जाने के 110 दिन बाद भी स्पीकर की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष व विधानसभा सचिव की ओर से न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जवाब की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इस पर अदालत ने जब महाधिवक्ता से जवाब प्रस्तुत नहीं करने का कारण पूछा तो महाधिवक्ता ने अवगत कराया कि 91 विधायकों के त्याग पत्र प्रकरण पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा निर्णय लिया जा चुका है और इस्तीफे निरस्त कर दिए गए हैं। महाधिवक्ता ने कहा कि आज कोर्ट के समय में हर हाल में विधानसभा सचिव की ओर से शपथ पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया जाएगा। उसकी प्रति राठौड़ को भी उपलब्ध करा दी जाएगी। ऐसे में जवाब पेश करने के साथ ही कॉपी राठौड़ को दी उपलब्ध कराई गई। इस पर हाईकोर्ट ने राठौड़ को जवाब देने के लिए तीन दिन का समय देते हुए मामले को 20 जनवरी को पुनः सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
Published on:
16 Jan 2023 08:08 pm
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