
जयपुर। भारत का निर्यात क्षेत्र अब तेजी से बदल रहा है और पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक व्यापार अब अकेले नहीं, बल्कि कई सिस्टम के मिलकर काम करने से आगे बढ़ रहा है। इस संबंध में राजधानी में बैठक आयोजित हुई। ‘द बॉर्डरलेस कलेक्टिव’ का जयपुर संस्करण आयोजित किया गया और इसे ‘सीज़न 1 जयपुर एक्सपोर्ट बैठक’ नाम दिया गया। जिसमें निर्यात से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और कंपनियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य निर्यातकों को आने वाली समस्याओं और उनके समाधान पर चर्चा करना था।
जयपुर आज देश का एक प्रमुख निर्यात केंद्र बन चुका है। यहां से हस्तशिल्प, टेक्सटाइल, ज्वेलरी और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स बड़ी मात्रा में विदेशों में भेजे जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद स्थानीय निर्यातकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर भुगतान, लॉजिस्टिक्स और अनुपालन जैसी प्रक्रियाएं काफी जटिल हैं। अलग-अलग सिस्टम होने के कारण काम में देरी और अतिरिक्त खर्च भी बढ़ जाता है।
बैठक में लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग, ई-कॉमर्स और अनुपालन से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि निर्यात को आसान बनाने के लिए इन सभी सिस्टम का एक साथ काम करना जरूरी है। अगर भुगतान, शिपिंग और अन्य प्रक्रियाएं बेहतर तरीके से जुड़ जाएं, तो निर्यातकों को काफी राहत मिल सकती है और उनका काम तेजी से आगे बढ़ सकता है।
बैठक के दौरान जयपुर के निर्यात तंत्र पर एक रिपोर्ट भी पेश की गई। इसमें बताया गया कि शहर का उत्पादन स्तर मजबूत है, लेकिन उत्पादन के बाद की प्रक्रियाओं में समस्याएं बढ़ रही हैं। खासतौर पर लॉजिस्टिक्स पर दबाव, वैश्विक बाजार तक पहुंच और उत्पाद की वैल्यू बढ़ाना अब बड़ी चुनौतियां बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्यातक वैश्विक मांग के साथ खुद को कितनी जल्दी जोड़ पाते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि अब केवल अच्छा उत्पाद बनाना ही काफी नहीं है। निर्यातकों को मजबूत सिस्टम तैयार करने होंगे, जिसमें भुगतान, लॉजिस्टिक्स और अनुपालन सभी शामिल हों। अगर ये सभी एक साथ और व्यवस्थित तरीके से काम करें, तो ही निर्यात में तेजी लाई जा सकती है।
बैठक में यह भी साफ हुआ कि भारत के एमएसएमई निर्यात को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी पूरी क्षमता तभी सामने आएगी जब उन्हें बेहतर सिस्टम और सहयोग मिलेगा। इसी दिशा में ‘द बॉर्डरलेस कलेक्टिव’ जैसी पहल को एक कदम माना जा रहा है, जो अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़कर निर्यातकों को बेहतर सुविधा देने की कोशिश कर रही है।
Published on:
27 Mar 2026 09:35 pm
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