
विजय शर्मा, देवेंद्र सिंह
जयपुर. महंगाई की मार अब पूजा-अर्चना में भी देखने को मिल रही है। भगवान के लिए मन में गहरी आस्था है लेकिन पूजा-पाठ में लोग कंजूसी कर रहे हैं। पूजा-पाठ में काम आने वाली सामग्री भी सस्ती खरीदी जा रही है। ऐसे में लोग भगवान से भी भेदभाव कर रहे हैं। सस्ती सामग्री की मांग देखते हुए बाजाराें में पूजा के लिए मिलावटी घी बेचा जा रहा है। शहर के मंदिरों के आस-पास दुकानों में इसकी बिक्री अधिक हो रही है। पूजा का घी बोलकर यह खरीदा व बेचा जा रहा है। राजस्थान पत्रिका ने गुरुवार काे शहर के मंदिरों के आस-पास एक दर्जन जगहों पर जाकर स्टिंग किया। पत्रिका टीम ने दुकानों पर जाकर पूजा के नाम पर बिकने वाले घी के बारे में पूछताछ की। हमें अधिकतर जगहों पर 200-250 रुपए किलो वाला घी ही दिखाया गया। जबकि खाना वाले घी की कीमत 500 से 550 रुपए किलो है।
पत्रिका ने खरीदा घी, मिलावटी मिला
बाजार से पूजा के नाम पर बिकने वाले घी को पत्रिका टीम ने खरीदा। इतना ही नहीं, इस घी को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को दिखाया। सुरक्षा अधिकारियों ने घी की प्रथम दृष्टया जांच की और उसे मिलावटी बता दिया। आधिकारिक रूप से उसके सैंपल भी लिए।
इसीलिए रखना जरूरी
पत्रिका पड़़ताल के दौरान दुकानदारों ने कहा कि पूजा के लिए लोग खुद सस्ता घी मांगते हैं। लोग इसे सिर्फ पूजा के लिए ही इस्तेमाल करते हैं। वहीं, खाने के लिए अलग से घी लेकर जाते हैं। मांग देखते हुए दुकानों पर सस्ता घी रखना पड़ता है।
केस--1
स्थान : बजाज नगर
130 में लाई थी, 150 दे जाओ
रिपोर्टर : घी मिलेगा क्या
दुकानदार : किस काम के लिए चाहिए
रिपोर्टर : पूजा के लिए घी चाहिए
दुकानदार : ये वाला पूजा के काम आता है, ले जाओ
रिपोर्टर : कितने का मिलेगा
दुकानदार : 500 ग्राम घी है, 150 रुपए दे जाओ
केस--2
स्थान : जवाहर नगर गोल मार्केट
रिपोर्टर : पूजा के लिए घी चाहिए
दुकानदार : कौन सा वाला
रिपोर्टर : आपके पास कौन सा है
दुकानदार : ब्रांडेड या सस्ता चलेगा
रिपोर्टर : दोनों की ही रेट बता दो
दुकानदार : सस्ता आधी कीमत में ही मिल जाएगा, ये पूजा के लिए ही चलता है।
एक्सपर्ट व्यू: मिलावटी घी खतरनाक
मिलावटी घी बनाने में सोयाबीन का तेल, वनस्पति तेल और खुशबू के लिए एसेंस का उपयोग करते हैं। कई केमिकल्स भी मिलाए जाते हैं। इस तरह तैयार घी सेहत के लिए धीमे जहर से कम नहीं है। इसके सेवन से व्यक्ति को कैंसर, लिवर, किडनी की दिक्कत हो सकती है। सस्ते के चक्कर में लोग खरीद लेते हैं।
डॉ. सुधीर महर्षि, सह आचार्य, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग, एसएमएस अस्पताल
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भेदभाव से पूजा फलदायक नहीं
पूजा के लिए शुद्धता का भाव जरूरी है। अखंड ज्योत सहित अन्य अनुष्ठान के लिए देशी घी काम में लेना चाहिए। भोग प्रसाद सब शुद्ध हो। भेदभाव करने से भक्त केवल औपचारिकता पूरी कर रहा है। खुद खाने में गुणवत्ता वाली चीज काम में लेते हैं लेकिन पूजन सामग्री और घी चढ़ाने में भेदभाव से पूजा फलदायक नहीं होती।
ज्याेर्तिविद, पं. घनश्याम लाल स्वर्णकार
Published on:
28 Jul 2023 10:42 am
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