
Agahan Dwitiya Vrat Ashunya Shayan Dwitiya Vrat Vidhi Puja Muhurat
जयपुर. मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की द्वितीया को अशून्य शयन द्वितीया व्रत रखा जाता है. यह व्रत दरअसल लगातार पांच मासों की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर रखे जाने का विधान है। श्रावण माह की कृष्ण पक्ष द्वितीया पर प्रारंभ होनेवाला यह व्रत भाद्रपद कृष्ण द्वितीया, आश्विन कृष्ण द्वितीया, कार्तिक कृष्ण द्वितीया तथा अगहज अर्थात मार्गशीर्ष कृष्ण द्वितीया को रखा जाता है। इस व्रत से पूर्ण वैवाहिक सुख मिलता है।
विवाहित स्त्री और पुरुष दोनों यह व्रत रख सकते हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से जहां पुरुषों के दांपत्य जीवन में सुख बढते हैं और दुखों में कमी आती है वहीं स्त्रियों को भी सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत आर्थिक समस्या का भी निवारण करता है। धन प्राप्ति का उद्देश्य भी इससे पूरा होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
विष्णुधर्मोत्तर, मत्स्य पुराण, पद्मपुराण, विष्णुपुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में अशून्य शयन व्रत का महत्व बताया गया है। अशून्य शयन का भावार्थ है- बिस्तर में अकेले न सोना. नाम के अनुरूप इस व्रत और पूजा के माध्यम से विवाहित दंपत्ति अपने जीवन को मधुर बना सकते हैं। अशून्य शयन द्वितिया व्रत से पति-पत्नी के रिश्ते बेहतर होते हैं, उनमें प्यार और आपसी सामंजस्य बढ़ता है। दांपत्य जीवन की सभी प्रकार की समस्या खत्म हो जाती है।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार इस दिन स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प करें। शाम को विधि विधान से मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें. सफेद मिष्ठान्न और केले का भोग लगाएं। धूप दीप के साथ मंत्र जाप करें। मन्त्रों के जाप के बाद विष्णुजी और लक्ष्मीजी को शयन करवा दें। इसके बाद कलश में जल के साथ दूध और चावल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। चंद्र देव की पूजा के बाद ही अशून्य शयन व्रत का पारण होता है।
Published on:
01 Dec 2020 09:04 am

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