जयपुर। देश के पूर्व नियंत्रक और महालेखा परीक्षक राजीव महर्षि ने कहा कि प्रशासन के हर एक स्तर पर अधिकारियों की ज़वाबदेही सुनिश्चित होना सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जवाबदेही के मानकों में राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता होना बेहद आवश्यक है। महर्षि रविवार को जयपुर में राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद की मेज़बानी में आयोजित हो रहे अखिल भारतीय राज्य नागरिक एवं प्रशासनिक सेवा महासंघ के 16वें अधिवेशन के दौरान देशभर से आए राज्य प्रसाशनिक अधिकारियों को वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। महर्षि ने अपने वक्तव्य में प्रशासन की चुनौतियों, सुशासन के लिए भविष्य की आवश्यकताओं, सेवाओं के उचित वितरणए आदि के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शासन के पारंपरिक तौर तरीक़ों में बदलाव करते हुए हर स्तर पर काम कर रहे विभागों में परस्पर तालमेल और संवाद बेहद आवश्यक हैं जिससे कि एक दूसरे की जि़म्मेदारियों और भागीदारियों के प्रति जवाबदेही को सुनिश्चित किया जा सके। महर्षि ने मनरेगा का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासन में सबसे निचले स्तर पर भी उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता सबसे अधिक है ताकि लिए गए निर्णयों, नीतियों और उनके परिणामों में एकरूपता स्थापित की जा सके।
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दलते परिवेश में बदलते नैतिक मूल्यों और चुनौतियों पर चर्चा
सेमिनार का अगला सत्र में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र भटनागर ने सिविल सेवकों के दृष्टिकोण और आगे का रास्ता विषय पर वक्तव्य दिया जहां उन्होंने बदलते परिवेश में बदलते नैतिक मूल्यों और चुनौतियों पर चर्चा की। सम्मेलन में भाग ले रहे सभी प्रतिनिधियों ने राजस्थान की मेज़बानी पर मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने इसके लिए आरएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव बजाड को धन्यवाद दिया। अधिवेशन की साधारण सभा में विभिन्न राज्यों से आए प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने अपने अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय राज्य नागरिक एवं प्रशासनिक सेवा महासंघ अध्यक्ष डॉ.जीबन चक्रवर्ती,महासचिव शवदुलार सिंह और इस अधिवेशन के आयोजक,आरएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव बजाड ने आमंत्रित वक्ताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया ।