
जयपुर। जमीन के बदले ज्यादा कीमत की जमीन देकर (मुआवजे के रूप में) चहेते डवलपर-कॉलोनाइजर्स को फायदा पहुंचाने से जुड़े कथित घोटाले की कई फाइलें गायब हैं। इनमें से ज्यादातर फाइलें सेक्टर रोड की जमीन से जुड़ी हुई हैं। ऐसे 6-7 मामले बताए जा रहे हैं, जिनमें जयपुर के जोन 11 व 14 में ज्यादा कीमत की भूमि दी गई।
नगरीय विकास मंत्री के पास अधूरी रिपोर्ट पहुंची तो इसका खुलासा हुआ। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जेडीए अफसरों को फाइलें ढूंढने के लिए सर्च पत्र जारी करने और फिर भी नहीं मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहा है। हालांकि, फाइलों को ऑनलाइन भी अपलोड किया जाता रहा है, लेकिन इन मामलों में ऐसा किया गया है या नहीं, यह भी साफ नहीं है।
विभाग का जिम्मा संभालने के बाद मंत्री ने 9 जनवरी को पहली बैठक ली। इसमें पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में हुए जमीन के बदले जमीन देने के मामलों की रिपोर्ट ली और फिर आगामी आदेश तक रोक लगा दी थी। इसके बाद जेडीए ने मंत्री को बतौर जेडीए अध्यक्ष रिपोर्ट भेजी, लेकिन अभी तक भी इसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। आखिर इन मामलों में गड़बड़ी हुई या नहीं और हुई है तो कौन दोषी है?
जयपुर में फागी रोड पर लाखना से वाटिका की दिशा में 6.8 किलोमीटर लम्बी सेक्टर रोड प्रस्तावित है। यहां से कुछ खातेदारों को मुआवजे के रूप में जमीन जगतपुरा महल रोड पर जयचंदपुरा, पार्थ नगर, खेड़ा जगन्नाथपुरा में दे दी गई। सेक्टर रोड के लिए ली गई जमीन की कीमत और जहां भूमि दी गई, उनकी बाजार दर में तीन से चार गुना का अंतर है।
जयपुर में शिवदासपुरा फाटक से पहले रेलवे लाइन के समानांतर 200 फीट चौड़ी सेक्टर रोड प्रस्तावित है। अवाप्ति के लिए अवार्ड 2013 में जारी किया गया, लेकिन मामला अटक गया। इस बीच कुछ कॉलोनाइजर्स ने यहां किसानों से आरक्षण पत्र खरीद का एग्रीमेंट कर लिया। मुआवजे के रूप में जमीन रिंग रोड के आउटर एरिया में विकसित कॉरिडोर और जयचंदपुरा में दी गई।
जयपुर में रिंग रोड के पास ऐसे कई मामले हैं, जहां मुआवजे के रूप में जमीन के बदले जमीन दी गई। फागी रोड, नेवटा, गोनेर रोड, सेज के आस-पास के ज्यादा मामले हैं। इसके अलावा जोन 12 में सेज से जुड़े इलाकों में सेक्टर रोड के लिए जमीन अवाप्त की गई।
कुछ फाइलें नहीं मिल रही हैं, उन्हें जल्द ढूंढने के लिए कहा है। अभी जेडीए स्तर पर रिपोर्ट पर पूरा काम नहीं हुआ है। रिपोर्ट फाइनल होने के बाद सब कुछ सार्वजनिक कर देंगे। सरकार की मंशा जीरो टॉलरेंस की है और यह काम भी उसी दिशा में है।
- झाबरसिंह खर्रा, नगरीय विकास मंत्री
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Published on:
13 Jun 2024 08:05 am
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