
पशुओं को मिलेगी खास पहचान, ई-मार्केट होगा विकसित
जयपुर
Animal tagging : जिस तरह से आधार कार्ड से हमारी एक पहचान है, ठीक उसी तरह से दुधारू पशुओं के लिए एक आधार कार्ड की तरह ही कार्ड बनाया जा रहा है। इस कार्ड से न केवल पशुओं को खास पहचान मिल सकेगी बल्कि इससे इनका खरीद बेचान भी आसानी से किया जा सकेगा। इससे ई—मार्केट को बढ़ावा मिलने से पशुपालकों को बिचौलियों से मुक्ति मिलने से फायदा होगा। पशुओं को अलग से पहचान देने के लिए उनकी टेगिंग का काम अभी करवाया जा रहा है। इस टेंगिंग से दुधारू पशु गाय, भैंस की पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। जिले के सभी दुधारू पशुओं, जिनमें गाय और भैंस वंश के पशु शामिल हैं, इनकी टेगिंग कर उनके पंजीकरण का काम इन दिनों तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस डेटाबेस के संग्रह से स्थानीय के साथ ही वैश्विक स्तर पर इन दुधारू पशुओं के क्रय-विक्रय में उचित मूल्य हेतु ई-मार्केट का विकास हो सकेगा। यह योजना पशुपालकों की आमदनी बढाने में लाभकारी होगी। इस नई व्यवस्था के लिए ईनाफ पोर्टल विकसित किया गया है। इसकी खास बात यह होगी कि इस पर पशुओं को आवंटित किया गया टेग नम्बर डालकर उसकी पूरी जानकारी घर बैठे ही प्राप्त की जा सकेगी।
डेटाबेस होगा तैयार
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ.उम्मेद सिंह ने बताया कि पशुओं का विस्तृत डेटाबेस तैयार करने के इस काम के लिए पशुपालन विभाग की ओर से सम्बन्धित संस्थाओं, अधिकारियों-कर्मचारियों की टीमों का गठन किया गया है। पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी पशुपालकों के बीच डोर-टू-डोर जाकर उनके पशुओं का पंजीकरण और टेगिंग कर रहे हैं। पशुओं का पंजीकरण किए जाने से हर पशु को एक विशेष पहचान मिल सकेगी। इससे नस्ल सुधार संबंधित जानकारी के जरिए उन्नत नस्ल के पशुवंश का संरक्षण और संवर्धन किया जा सकेगा।
ये फायदा भी होगा
इसके साथ-साथ टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान, नाकारा नस्ल के पशुओं का बाधियाकरण का रिकॉर्ड संधारण करने में आसानी होगी। इस अभियान से एक राज्य से दूसरे राज्य में पशुओं के संक्रामक रोगों के प्रसार और संक्रमण पर अंकुश लग सकेगा। पशुओं का अनुवांशिक ब्यौरा संकलित किया जा सकेगा, जिससे पशुओं की उन्नत नस्लों का संरक्षण एवं संवर्धन होगा। इस कार्यक्रम से पशु स्वास्थ्य संबंधी समस्त जानकारी जैसे समस्त टीकाकरण, रोगों की रोकथाम की संकलित जानकारी संधारित की जाएगी।
ईनाफ पर होगी जानकारी
विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विकास शर्मा ने बताया कि समस्त पंजीकृत पशुओं और पशुपालकों की सम्पूर्ण जानकारी ईनाफ सॉफ्टवेयर में इंद्राज किया जाना जरूरी है। ईनाफ टेगिंग में पशुओें की समस्त जानकारी ‘आधार कार्ड’ के समकक्ष महत्व की होगी। इसके पशुपालकों को राज्य सरकार, पशुपालन विभाग की नवीन योजनाओं का लाभ देने में आसानी होगी।
Published on:
31 Jan 2020 04:57 pm
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