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Arhar Dal Price: महंगाई में एक ओर झटका, थम नहीं रहे अरहर दाल के दाम…सख्ती के बावजूद लगातार बढ़ रहे है भाव

महंगाई के इस दौर में आम आदमी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। गेहूं, चावल के बाद अब अरहर की कीमतों पर अंकुश नहीं लग रहा है, सरकार की सख्ती के बावजूद इसके दाम बढ़ रहे हैं।

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Arhar Dal Price: महंगाई में एक ओर झटका, थम नहीं रहे अरहर दाल के दाम...सख्ती के बावजूद लगातार बढ़ रहे है भाव

Arhar Dal Price: महंगाई में एक ओर झटका, थम नहीं रहे अरहर दाल के दाम...सख्ती के बावजूद लगातार बढ़ रहे है भाव

महंगाई के इस दौर में आम आदमी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। गेहूं, चावल के बाद अब अरहर की कीमतों पर अंकुश नहीं लग रहा है, सरकार की सख्ती के बावजूद इसके दाम बढ़ रहे हैं। पिछले 15 दिनों के दौरान अरहर के थोक भाव 800 से 1000 रुपए क्विंटल बढ़ चुके हैं। थोक कीमतें बढ़ने से खुदरा बाजार में अरहर दाल भी महंगी हुई है। अरहर की कीमतों में तेजी की वजह मांग की तुलना में आपूर्ति कम होना है, क्योंकि अरहर का उत्पादन कम है। आयात भी घरेलू कीमतों से महंगा पड़ रहा है। मंडियों में अरहर व अरहर दाल के भाव बढ़ने का असर इसकी खुदरा कीमतों पर भी पड़ रहा है। महीने भर में अरहर दाल की औसम खुदरा कीमत 115 रुपए से बढ़कर 120 रुपए किलो हो गई है।

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15 दिनों में 1000 रुपए क्विंटल तक महंगी

दाल व्यापारी श्याम नाटाणी ने कहना है कि अरहर की उपलब्धता देश में इस साल कम है। इसलिए अरहर और अरहर दाल के दाम बढ़ रहे हैं। बीते 15 दिनों के दौरान मंडी में अरहर के दाम 800 रुपए बढ़कर 9800 रुपए प्रति क्विंटल हो चुके हैं, जबकि दाल के भाव भी बढ़कर 13,000 रुपए क्विंटल पार कर चुके हैं। अरहर की नई फसल आने में अभी 6 महीने है। इसका आयात घरेलू कीमतों से महंगा पड़ रहा है। नाटाणी का कहना है कि बढ़ते दामों को देखते हुए सरकार को दाल की उपलब्धता बढ़ाने के लिए महंगी दरों पर आयात कर इसे सस्ते दामों पर देश में बेचना चाहिए। तभी कीमतों पर अंकुश लग सकता है।

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मानसून में देरी को लेकर चिंता बढ़ी

अरहर का उत्पादन पहले से ही कम होने के बीच मानसून में देरी के कारण आगामी नई फसल को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। अरहर की आवक कम होने से इसके भाव बढ़ रहे हैं। इस साल मई महीने में करीब 91 हजार टन अरहर की आवक हुई, जो पिछले साल मई महीने की आवक करीब 1.17 लाख टन से 22 फीसदी कम है।

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