
indira gandhi panchayati raaj
जयपुर। पंचायती राज विभाग को वर्ष 2013 में बोनस अंको के आधार पर कनिष्ठ लिपिक पद पर भर्ती हुए कार्मिको को नियमित वेतनमान स्वीकृत करने को लेकर इतनी जल्दी थी कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति से वित्त विभाग की ओर से तय की गई तीन शर्तो में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण शर्त को ही दरकिनार कर दिया गया। पंचायती राज विभाग ने भर्ती के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त टंकण परीक्षा लिए बिना ही लिपिको को नियमित वेतनमान व भत्ते स्वीकृत करते हुए 120 करोड़ रुपए का एरियर के रूप में रेवडिय़ा बांट दी। जब मामले को लेकर कुछ कर्मचारी संगठनों ने विभाग में आपत्तियां दर्ज करवाई तो करीब डेढ़ वर्ष के बाद विभाग के अतिरिक्त आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव ने कार्मिक विभाग के स्थान पर अतिरिक्त महाअधिवक्ता की राय मात्र से कनिष्ठ लिपिक पद पर भर्ती के लिए अनिवार्य टंकण परीक्षा में छूट का आदेश प्रसारित कर दिया गया।
यह था मामला
पंचायती राज विभाग में वर्ष 2013 में कनिष्ठ लिपिक पदों पर हजारों नियुक्तियां दी गई। यह नियुक्तियां बोनस अंको के विवाद के कारण कनिष्ठ लिपिको को नियमित वेतनमान स्वीकृत नहीं हो रहा था। इस पर पंचायती राज विभाग की ओर से विधि, कार्मिक एवं वित्त विभाग को पत्रावली भिजवाई गई। इस पर मुख्यमंत्री की स्वीकृति से 9 दिसम्बर 2015 को वित्त विभाग ने तीन शर्तो का उल्लेख करते हुए कनिष्ठ लिपिको को नियमित वेतनमान देने की पंचायती राज विभाग को अनुमति जारी की। जिस पर पंचायती राज विभाग की ओर से 15 दिसम्बर 2015 को जारी आदेश में वित्त विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री की ओर से स्वीकृत सर्वाधिक महत्वपूर्ण शर्त पद के लिए निर्धारित आधारभूत प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया गया हो को ही छोड़ दिया गया।
क्यों दी छूट
पंचायती राज विभाग में बोनस अंको के आधार पर नियुक्त हुए कनिष्ठ लिपिको की प्रशैक्षणिक योग्यता के बारे में उच्च अधिकारियों को पूर्ण जानकारी थी कि बहुत बड़ी संख्या में ऑफ कैम्पस स्टडी सेंटर के माध्यम से कम्प्यूटर योग्यता की फर्जी डिग्रियां व डिप्लोमा प्रस्तुत कर इन्होंने नियुक्तियां तो प्राप्त कर ली है। यदि टंकण परीक्षा ली गई तो उनमें से काफी संख्या में परीविक्षा काल में ही कनिष्ठ लिपिक आयोग्य हो जाएंगे।
क्या है नियम
आरपीएसएस एवं अन्य चयन आयोगों की ओर से कनिष्ठ लिपिक या मंत्रालयिक सवर्ग की भर्ती के समय लिखित परीक्षा के साथ-साथ टंकण परीक्षा के लिए भी अलग से अंको का निर्धारण किया जाता है एवं दोनों परीक्षाओं की मेरिट के आधार पर अभ्यार्थी का चयन किया जाता है। अनुकम्पा नियुक्ति में ही यह छूट प्रदान की गई है कि नियुक्ति के बाद टंकण परीक्षा दी जा सकती है। अनुकम्पा के माध्यम से नियुक्त कार्मिको को भी यह छूट नहीं है कि उन्हें टंकण परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना उनका नियमित वेतनमान स्वीकृत किया जा सके।
वर्जन
वित्त विभाग की संशोधित स्वीकृत के बिना पूर्व की तय शर्तो में प्रशासनिक विभाग कोई फेरबदल नहीं कर सकता है। महेन्द्र सिंह भूखर संयुक्त सचिव (नियम), वित्त विभाग
विभाग ने अतिरिक्त महाअधिवक्ता की राय से टंकण परीक्षा में छूट दी है। जहां तक मुझे ध्यान है कि फाइल डीओपी एवं वित्त विभाग में भी गई थी। राजेन्द्र शेखर मक्कड़, अतिरिक्त आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव, पंचायतीराज विभाग
Published on:
09 Jun 2018 04:50 pm

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