पेंटिंग ऐसी कला है जिसमें आप अपनी कल्पना को उकेर सकते हैं। समय के साथ इसमें भी आधुनिकता आई है और कला प्रेमियों को कला के कई रूप देखने को मिल रहे हैं। राजधानी जयपुर में ऐसे कई कलाकार हैं जो अपने अपने तरीके से पेंटिंग्स में नए नए प्रयोग कर रहे हैं कोई नाइफ से पेंटिंग कर रहा है तो कोई पंख पर रंग उकेर कर कला का नया रूप सामने ला रहा है तो कोई आग से कैनवास पर पेंटिंग कर रहा है। सिटी के ऐसे ही कुछ आर्टिस्ट्स ने पत्रिका से शेयर की अपनी सफलता की कहानी
इन्हीं कलाकारों में शामिल अजीत कुमार आज हमारे बीच नहीं है। लंबे समय से बीमार चल रहे अजीत की गुुरुवार रात मृत्यु हो गई लेकिन कुछ समय पत्रिका से हुई बातचीत में उन्होंने अपने कला के सफर को कुछ इस तरह से साझा किया था।राजधानी जयपुर के फायर आर्टिस्ट अजीत आग से कैनवास पर खेलते खेलते तस्वीर उकेरने वाले कलाकार थे। अलग.अलग गैस लाइटर की चिंगारी से तस्वीर को आकार देने वाले अजीत 12 साल से पेंटिंग बना रहे थे उन्हें फायर से पेंटिंग बनाने का आइडिया ब्रेड के जलने से आया। उन्होंने बताया था कि वह पहले कलर पेंटिंग बनाते थे। हाथों पर कलर से रिएक्शन के कारण फफोले पड़ जाते थे। एक बार घर में गैस पर ब्रेड सेंक रहे थे उस दौरान उस पर अलग.अलग आकृतियां उभर रही थीं। तभी उन्हें आग से पेंटिंग बनाने का आइडिया आया। लगातार कोशिश की। कई बार हाथ जले,कई बार पेंटिंग खराब भी हुई अंत में सफलता मिली। इस पेंटिंग के लिए प्लाई पर फेविकोल से लकड़ी का बुरादा चिपकाया जाता है। दो दिन सूखने के बाद कैनवास तैयार होता है, उस पर तस्वीर की आउटलाइन दी जाती है। फिर आग को कंट्रोल करते उकेरा जाता है। एक पेंटिंग बनाने में कई दिन का समय लगता है। अजीत महात्मा गांधी,रविंद्रनाथ टैगोर, राज्यपाल कलराम मिश्र सहित कई नामी शख्सियतों की तस्वीरें बना चुके थे। उनकी कई प्रदर्शनियां भी लग चुकी थीं।
—————- –
कैनवास पर लाख से पेंटिंग कर रही द्रौपदी
सुहाग की निशानी माने जाने वाले लाख से चूडिय़ांं और कड़े तो आमतौर पर महिलाएं सालों से पहनती आई हैं लेकिन क्या इसी लाख को कैनवास पर पेंटिंग के रूप में उकेरा जा सकता है। जी हां, ऐसा किया जा सकता है और ऐसा ही कुछ कर रही है राजधानी जयपुर की लाख आर्टिस्ट द्रौपदी मीणा। द्रौपदी के मुताबिक बचपन से ही आर्ट एंड क्राफ्ट में रुचि थी, जिस पर शादी के बाद कुछ समय के लिए ब्रेक लग गया लेकिन तकरीबन चार साल पहले लाख की टूटी हुई चूडिय़ों को समेटेते हुए उन्हें गैस पर गर्म कर कैनवास पर फूल पत्ती उकेरे तो लगा कि कुछ हटकर किया है। बस वहीं से पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया। द्रौपदी के मुताबिक सपने पूरे करने की कोई उम्र नहीं होती जब मौका मिले आगे बढ़े और अपने सपनों को हकीकत में बदलें। राजस्थान अनसंग अवॉर्ड सहित कई पुरस्कार जीत चुकी द्रौपदी के मुताबिक लाख से पेंटिंग बनाना आसान नहीं। एक निश्चित तापमान तक लाख को गर्म करना होता है उसके बाद पेंटिंग बनती है।
—————–
पंखों पर कल्पना के रंग भर रही अदिति अग्रवाल
फेदर आर्टिस्ट अदिति अग्रवाल विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुकी है। चारकोल आर्टिस्ट के रूप में अपना जर्नी शुरू करने वाली अदिति को इंटरनेट ब्राउज़ करते समय एक पंख वाली पेंटिंग मिली और यहीं से पखों पर पेंटिंग करने की शुरुआत की। वह पंख पर किसी भी चीज़ को खूबसूरती से चित्रित कर सकती हैं। एक इंच के छोटे पंख से लेकर 20 इंच के बड़े पंख पर पेंटिंग बनाने वाली अदिति ने एक ही पंख पर पेंटिंग बनाने से धीरे.धीरे अपनी सीखी हुई तकनीक को विकसित किया और बड़े कला कार्यों को बनाने के लिए पंखों को एक साथ जोडऩा शुरू कर दिया। उन्होंने एक पेंटिंग बनाने के लिए 35 पंखों पर काम किया है। अदिति आमतौर पर कबूतर, मोर पंख और कौए जैसे पक्षियों के पंखों का इस्तेमाल करती हैं। । अदिति देश विदेश में अपनी पेंटिंग प्रदर्शनी लगा चुकी हैं, साथ ही अपनी कला के जरिए वह समाज सेवा से भी जुड़ी हैं। उन्होंने कई एनजीओज के साथ भी काम किया और झुग्गी में रहने वाली महिलाओं को सामान बनाना सिखाया है।
———————–
नाइफ पेंटिंग करने वाली कलाकार रीता पांडे
बचपन से ही पेंटिंग में रुचि रखने वाली डॉ. रीता पांडे नाइफ से पेंटिंग करती हैं। तकरीबन 23 साल पहले उन्होंने नाइफ पेंटिंग बनाना शुरू किया जिसमें परिवार को सपोर्ट मिला। पति को घूमने का बेहद शौक था, रीता उनके साथ जहां भी जाती, कैनवास ले जाना नहीं भूलती, पति और बच्चे घूमने में समय बिताते तो रीता उस स्थान की नैसर्गिक खूबसूरती को नाइफ के जरिए कैनवास पर उकरेने की कोशिश
करती। उनकी पेंटिंग की खासियत है कि जिन स्थानों का वह भ्रमण का चुकी ह्रै वह स्थान उनकी पेंटिग्स में अपना स्थान बना लेता है। केवल स्थान ही नही बल्कि प्रकृति,फूल,पेड़ आदि भी जीवंत हो उठते चित्रण को अपनी पेंटिंग पर है। शादी से पहले क्लास लिया करती थीं, शादी के बाद जयपुर आकर पीएचडी में व्यस्त रही और बच्चे हो गए लेकिन जब लगा कि दोबारा शुरुआत होना चाहिए तो फिर से शुरुआत कर दी। प्रदेश में महिला कलाकारों की स्थिति को लेकर उनका कहना है कि महिला कलाकारों को आगे नहीं बढ़ाया जाता। रीता कहती हैं कि उनका सपना है कि