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असम को ‘ऑसम’ बनाने में ‘इंस्टाग्राम’ की भी मदद

पूर्वोत्तर राज्य असम में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए असम सरकार ने लोकप्रिय फोटो और वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के साथ साझेदारी की है।

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जयपुर

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Amit Purohit

Sep 30, 2019

असम को 'ऑसम' बनाने में 'इंस्टाग्राम' की भी मदद

असम को 'ऑसम' बनाने में 'इंस्टाग्राम' की भी मदद

प्राकृतिक सुंदरता और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान को समेटे असम ने दुनिया में उभरने के अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके लिए सोशल मीडिया भी सहारा लिया जा रहा है। इसी कड़ी में अब प्रचार अभियान इंस्टाग्राम तक आ पहुंचा है। असम पर्यटन के सभी विज्ञापन और प्रचार मुख्य रूप से राज्य को ब्रह्मपुत्र नदी, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, असम के चाय-बागान तक पर्यटकों को लाने और सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विविधता से समृद्ध सबसे आकर्षक और नयनाभिराम पर्यटक स्थल के रूप में उभरने पर केंद्रित है। इंस्टाग्राम की विजुअल स्टोरीज के जरिए पहले से कहीं ज्यादा देशी-विदेशी पर्यटक असम से जुड़ पाएंगे।

जैसे ही 'ऑसम असम' हेशटैग का अनावरण किया गया, इंस्टाग्राम पर असम के नयनाभिराम नजारों की तस्वीरों की झड़ी लग गई। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में राज्य में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बहुत निवेश किया है। इसमें ब्रांड एम्बेसडर के तौर पर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के नेतृत्व में एक विशाल प्रचार अभियान भी शामिल है। इरादा, असम में भी सिक्किम जैसा पर्यटन माहौल बनाना है।


डिजिटल टूल्स से प्रमोशन
डिजिटल उपकरणों के व्यापक उपयोग, बुनियादी ढांचे के विकास और आकर्षक ब्रांड एंबेसडर को प्रचार अभियान में शामिल किए जाने से असम में पर्यटकों की आमद में वृद्धि हालांकि वैश्विक पर्यटन मानचित्र में अपनी जगह खोजने के लिए असम अभी भी मीलों दूर है। दावा है कि इस दूरी को पाटने और पर्यटन क्षमता का संपूर्ण दोहन करने के लिए पर्यटन विभाग लगातार एक व्यवस्थित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को अपनाने की तरफ बढऩे के प्रयास कर रहा है। माना जा रहा है कि राज्य में पर्यटन के लिए अपार संभावनाएं हैं, जरूरत सही कदम उठाने की है।


सिक्किम राज्य से सीख लेकर प्राकृतिक सुंदरता को भुनाएं
तकनीक के युग में, प्रचार और ब्रांड निर्माण का पर्यटन पर काफी फर्क पड़ता है। इसी के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को विकसित करने पर भी सरकार को ध्यान देना होगा ताकि पर्यटक परेशानी मुक्त सैर-सपाटे का आनंद ले सकें। दावा है कि अब पर्यटन से संबंधित किसी भी प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता पर विचार किए बिना उसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्यों में, केवल सिक्किम को ऐसा राज्य कहा जा सकता है, जिसने सिखाया है कि खुद को पर्यटन के लिहाज से ब्रांड कैसे बनाया जाए। मेलों और त्योहारों का आयोजन करके पर्यटक बुलाने की बजाय सिक्किम ने अपनी अनगढ़ प्राकृतिक सुंदरता को भुनाया, जो वहां पहले से ही बिखरी पड़ी है। यही नहीं, अपने स्तर पर राज्य ने बुनियादी ढांचे का विकास किया, स्थानीय लोगों ने भी सिक्किम को पर्यटन के लिए एक ब्रांड बनाने के प्रयास किए।


ब्लॉगर्स, व्लॉगर्स और फोटोग्राफी का 'स्वर्ग'
असम को ब्लॉगर्स, व्लॉगर्स और फोटोग्राफर्स का हेवन कहा जाता है क्योंकि राज्य में विविध, कई रंगों को समेटे लिए जातीय विविधता मौजूद है। यहां के आदिवासी समुदाय, उनका भोजन, संस्कृति और परंपरा अद्वितीय है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रमुख रिवरफ्रंट को एक विश्वस्तरीय मेकओवर दिए जाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जहां कोई भी पर्यटक लजीज व्यंजनों, संगीत का आनंद लेने के साथ-साथ खेल गतिविधियों में शामिल हो सके। पर्यटन उद्योग और यात्रियों के बदलते टेस्ट को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से असम में वैसी ही सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। टूर ऑपरेटरों, होटल व्यवसायियों, होमस्टे मालिकों और अन्य हितधारकों को भी यह समझाया जाए कि ग्राहकों और व्यवसायों के साथ सोशल मीडिया तकनीक से संवाद कैसे किया जा सकता है।

असम सरकार के अनुमान बताते हैं कि 2014 से 2018 के बीच पांच वर्षों में 131,000 से अधिक विदेशियों सहित लगभग 27 मिलियन पर्यटकों ने असम का दौरा किया। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मानसून पर्यटन के विकास और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे को बढ़ावा देने पर भी काम किया है।