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Back to School campaign: बच्चों को स्कूल वापस आने के लिए ‘बैक टू स्कूल’ गीत

पिछले दो वर्षों के कोविड संघर्ष से प्रभावित बच्चों और स्कूल व्यवस्था ( Back to School campaign ) के बिखरने पर आधारित एक प्रेरणादायक हिंदी गीत 'बैक टू स्कूल' मनोवैज्ञानिक डॉक्टर जवाहर सूरिसेट्टी द्वारा देश के बच्चों को 18 जून को समर्पित किया जा रहा है।

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Back to School campaign: बच्चों को स्कूल वापस आने के लिए 'बैक टू स्कूल' गीत

Back to School campaign: बच्चों को स्कूल वापस आने के लिए 'बैक टू स्कूल' गीत

Back to School campaign: पिछले दो वर्षों के कोविड संघर्ष से प्रभावित बच्चों और स्कूल व्यवस्था के बिखरने पर आधारित एक प्रेरणादायक हिंदी गीत 'बैक टू स्कूल' मनोवैज्ञानिक डॉक्टर जवाहर सूरिसेट्टी द्वारा देश के बच्चों को 18 जून को समर्पित किया जा रहा है। डॉक्टर जवाहर ने कहा की उनके पास पिछले सालों में हर रोज करीब 300 कॉल इसी विषय पर आते हैं की बच्चों के भविष्य एवं शिक्षा का क्या होगा। अभिभावकों के इस कश्मकश और सुधरी हुई हालत में फिर से स्कूल खुल रहे हैं, मगर पिछले वर्ष ये देखा गया कि अभिभावक स्कूल भेजने से डर रहे हैं। इस परिस्थिति के मद्देनजर रखते हुए और बच्चों के स्कूल नहीं जाने से जो विपरीत असर उनके शिक्षा एवं भविष्य पर पड़ रहा है वो कई शोध दर्शाते हैं। इस वक्त जो जरूरत है वो है विश्वास, प्रेरणा एवं सहज ढंग से बच्चों को स्कूल वापस लाने की कवायद। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलब्ध पर और हमारे भविष्य की पीढ़ी को प्रेरित करने के लक्ष्य से डॉक्टर जवाहर ने ये गीत लिखा है, जिसे साज और आवाज से सजाया है, जागृत ने जो आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स का शोधकर्ता है ।
इस गीत में स्कूल में दोस्त, दोस्ती, टीचर, मस्ती, पढ़ाई, खेल, बस, टिफन इत्यादि का उल्लेख करते हुए स्कूल वापस आने का आह्वान है। इसमें स्कूल के दिन याद करके उस अनुभव से वंचित रहने का अहसास भी है। इस गीत को देश को समर्पित करते हुए डॉक्टर जवाहर ने कहा की उनके पुराने गीत 'इंडिया हूं मैं, नाज है' को जिस तरह की अपार सफलता मिली है, इस गीत को भी अपने सामाजिक सरोकार की वजह से अच्छा प्रतिसाद मिलने की आशा जताई और स्कूलों को भी ये संदेश दिया की पढ़ाई इतनी रोचक बनाएं की बच्चे डर को दूर कर खुद स्कूल आने के लिए लालायित हों ।