VIDEO: राजस्थान में बढ़ रहा बांग्लादेशी-रोहिंग्याओं का घुसपैठ, राशन कार्ड-वोटर ID के बाद अब पासपोर्ट तक बनवा रहे फ़र्ज़ी

सिरदर्द बने घुसपैठियों ने जयपुर से बनवाए पासपोर्ट, सभी आवश्यक दस्तावेज होने के कारण पुलिस के हाथ बंधे

 

By: Nakul Devarshi

Published: 04 Jan 2018, 12:34 PM IST

जयपुर।

प्रदेश में सिरदर्द बने बांग्लोदशी घुसपैठियों ने अपने नेटवर्क के जरिए पासपोर्ट बनवाने में सफलता हासिल कर ली है। अब तक इनकी राशनकार्ड, मतदाता परिचय-पत्र बनवाने की बात सामने आ रही थी, लेकिन पासपोर्ट बनने की जानकारी मिलने से अब खुफिया तंत्र के भी कान खड़े हो गए हैं।

 

पड़ताल में सामने आया कि शहर के जवाहर सर्किल क्षेत्र में वर्तमान में 28 परिवारों के 192 सदस्य निवासरत हैं, जिन्हें पुलिस ने बांग्लादेशियों के रूप में चिहिंत किया है। उन सभी परिवारों के मतदाता पहचान-पत्र बन चुके हैं। राशनकार्ड भी उनमें से ज्यादातरों के पास हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर इनमें से कई पासपोर्ट बनवाने में भी सफल हो गए हैं।

 

पुलिस ने अब मतदाता पहचान-पत्र व राशन कार्ड निरस्त करने के लिए जिला कलेक्टर जयपुर को, ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आरटीओ जयपुर और पासपोर्ट हेतु पासपोर्ट नियंत्रण अधिकारी, जयपुर, मकानों के पट्टे निरस्त करने के लिए नगर निगम जयपुर, प्रवर्तन अधिकारी एवं आयुक्त जेडीए जयपुर को पत्र जारी किए हैं।

 

अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के असम से उठे विवाद से पूरे देश में फिर से बवाल मच गया है। राजस्थान में भी रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ के मामले सालों से सामने आ रहे हैं। हालात ये हैं कि पुलिस साल दर साल सर्वे कराती जाती है, लेकिन अवैध तरीके से रह रहे इन लोगों के पास मौजूद कुछ सरकारी दस्तावेज पुलिस की इस कार्रवाई पर भारी पड़ते हैं। जबकि ये बांग्लादेशी और रोहिंग्या परिवार अपराधिक मामलों में भी लिप्त हैं। इनके खिलाफ प्रदेश के कई थानों में दो दर्जन से भी ज्यादा मामले दर्ज हैं। बांग्लादेशियों की पहचान के लिए पुलिस अपने प्रयास करती है, लेकिन पुलिस के सामने इनको पुशबैक करने की बड़ी समस्या है।

 

प्रदेश में सात साल से लगातार कराया जा रहा है सर्वे
बांग्लादेशी और रोहिंग्या को लेकर प्रदेश में हर जिले में करीब सात साल से सर्वे किया गया है। सर्वे कार्य 2011 में शुरू किया गया था और पिछले साल 2017 तक किया गया। सर्वे में सामने आया कि राज्‍य के विभिन्‍न जिलों में कुल 837 (292 रोहिंग्‍या एवं 545 बांग्‍लादेशी) रोहिंग्‍या-बांग्‍ला‍देशी निवासरत हैं। बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को पुशबैक करने के लिए पुलिस प्रशासन प्रयास करता है। समय-समय पर पुलिस विभाग द्वारा अवैध रूप से रहने वाले रोहिंग्‍या व बांग्‍लादेशियों को अभियान चलाकर राज्‍य से बाहर करने की कार्यवाही की जाती रही है। अब तक 243 को राज्‍य से बाहर पुशबैक किया गया है, 32 को राज्‍य से बाहर भेजे जाने की प्रक्रियाधीन है।

 

दस्तावेज निरस्त करवाना कठिन
प्रदेश में सीमापार कर बांग्लादेशी जिस अवैध तरीके से घुसे, इसी तरह से इन बांग्लादेशियों ने सरकारी दस्तावेज तक बनवा लिए। जाहिर है ये सरकारी दस्तावेज सरकारी कार्यालयों से ही गलत तरीके से बने हैं। पुलिस को इसकी भनक भी लग गई है और पुलिस ने केंद्र सरकार तक को इस बारे में जानकारी दी है। समस्या पहचान और दस्तावेज की नहीं है, इससे भी बड़ी समस्या यह है कि इन बांग्लादेशियों को जो सरकारी दस्तावेज सरकारी विभागों से बने हैं उनको नष्ट करने के लिए पुलिस सरकारी विभागों से पत्राचार कर रही है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

 

अजमेर और जयपुर में नेटवर्क
सर्वे के अनुसार आठ सौ से ज्यादा रोहिंग्या और बांग्लादेशी राजस्थान में अवैध तरीके से रह रहे हैं। इन लोगों के पास कुछ सरकारी दस्तावेज भी मौजूद हैं और ये दस्तावेज ही पुलिस की कार्रवाई के दौरान प्रशासन पर भारी पड़ते हैं। ये बांग्लादेशी और रोहिंग्या परिवार अपराधिक मामलों में भी लिप्त हैं। जयपुर व अजमेर में इन लोगों पर पुलिस ने कुल 24 प्रकरण दर्ज किए हैं। इनमें से करीब पंद्रह प्रकरणों में चालान न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया है। आठ लंबित हैं।

 

धर्म की आड़ और रोजगार के नाम पर करते हैं घुसपैठ
राजस्थान पुलिस करीब सात साल से बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं पर नजर रखे हुए है। सात साल में कई परिवार राजस्थान में प्रवेश कर चुके हैं। पूछताछ में सामने आया है कि अधिकतर परिवार धर्म की आड़ और रोजगार के चलते अवैध रूप से प्रदेश में घुसे हैं। इनमें जयपुर और अजमेर में रहने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। वहीं सीमावर्ती जिले बीकानेर , गंगानगर, जोधपुर , उदयपुर , बाड़मेर और जैसलमेर में भी इनकी अच्छी खासी संख्या है।

 

जयपुर-अजमेर की इन कॉलोनियों में रह रहे हैं परिवार
अजमेर के क्रिश्चयनगंज, दरगाह और सारवाड़ जयपुर के विद्याधर नगर, सांगानेर सदर, सोडाला, कानोता, जवाहर सर्किल, सदर और प्रागपुरा क्षेत्र में अलवर के शाहजहांपुर और भिवाड़ी क्षेत्र समेत अन्य जगहों पर अच्छी खासी संख्या में बांग्लादेशी परिवार रह रहे हैं।

 

बांग्लादेशी मूल के उन लोगों को पासपोर्ट जारी किया जाता है, जिन्हें भारत की नागरिकता मिल चुकी होती है। पासपोर्ट प्रक्रिया में निर्धारित सभी वैध पहचान दस्तावेज उपलब्ध करवाने और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही पासपोर्ट जारी किया जाता है। यदि पुलिस मुख्यालय ऐसे पासपोर्ट को रद्द करने के लिए कहेगा तो उन्हें रद्द कर दिया जाएगा।
- एसआर मीना, पासपोर्ट अधिकारी, जयपुर

Nakul Devarshi
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned