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7 जून को सचिवालय का करेगी घेराव भाजपा

    भाजपा ने आईटी विभाग के राजनेट प्रोजेक्ट में घोटाले के लगाए आरोप सरकार ने 3500 करोड़ के घोटाले की शिकायत की जांच की अनुमति क्यों नहीं दी: भाजपा

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7 जून को सचिवालय का करेगी घेराव भाजपा

7 जून को सचिवालय का करेगी घेराव भाजपा

जयपुर. डीओआईटी में मिली नकद राशि और सोने के बाद भाजपा ने बड़ा आरोप लगाया है। भाजपा ने एक परिवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि एसीबी में यह दर्ज हुआ, जिम्मेदारों से पूछताछ के लिए एसीबी ने राज्य सरकार से अनुमति मांगी, लेकिन अनुमति नहीं दी गई? आखिर सरकार किसे बचा रही है। आईटी और गृह विभाग मुख्यमंत्री के पास है। आईटी के राजनेट प्रोजेक्ट में साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए के घोटाले के इस परिवाद की परतें खुलेंगी तो मुख्यमंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित विभाग के कई अधिकारी चपेट में आएंगे। आईटी विभाग के घोटालों को लेकर भाजपा 7 जून को सचिवालय का घेराव करेगी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सी.पी. जोशी, नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि आईटी के राजनेट प्रोजेक्ट, पोस मशीन खरीद को लेकर एसीबी में शिकायतें हुई। शिकायतकर्ता के परिवाद पर फरवरी, 2021 में एसीबी ने संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति मांगी, लेकिन सरकार ने मना कर दिया। यह सरकार संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। नेताओं ने कहा कि यदि आईटी विभाग की सही से जांच करवा ली जाए तो इसमें बीस से पच्चीस हजार करोड़ का घोटाला सामने आएगा। सांसद किरोड़ी ने कहा कि ईडी और सीबीआई इन घोटालों की जांच कर ले तो सरकार को लेने के देने पड़ जाएंगे।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सी.पी. जोशी ने कहा कि ऐसा कौनसा अधिकारी आ गया जो 2014 से सारे फैसले ले रहा है, कौन है जो सोना लेना पसंद करता है।

क्या अपनी सरकार को घेर गए किरोड़ी?

सांसद किरोड़ी ने आईटी विभाग के जिन घोटालों के परिवाद का जिक्र किया, उनमें ज्यादातर भाजपा सरकार के समय के मामले हैं। इस परिवाद में ज्यादातर मामलों का जिक्रजिस साल का है, वो 2016-18 के हैं। ऐसे में यह सियासी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या किरोडी़ ने अपनी ही सरकार पर ये आरोप लगा डाले? किरोड़ी ने यह भी आरोप लगाया कि राजनेट प्रोजेक्ट के तार एसीएस अखिल अरोड़ा और सीएम तक जुड़े हैं, लेकिन जब मीडिया ने उनसे अरोड़ा से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वे उपलब्ध नहीं करवा पाए। वे यही कहते रहे कि परिवाद में जिन मामलों का जिक्र है, उस काल में आईटी का जिम्मा अखिल अरोड़ा के पास ही था।