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अंबेडकर जयंती 2019: डॉ. भीमराव अंबेडकर और दलितों के संघर्ष में क्यों नजर आता है नीला रंग, जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर

अंबेडकर की प्रतिमाओं और तस्वीरों को जब भी हम देखते हैं तो वह नीले रंग में नजर आती हैं।

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जयपुर

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Abdul Bari

Apr 14, 2019

जयपुर

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर (अंबेडकर जयंती 2019) की प्रतिमाओं और तस्वीरों को जब भी हम देखते हैं तो वह सब नीले रंग में नजर आती हैं। यही नहीं अगर आप दलितों के संघर्ष को देखें तो तब भी आप दलितों के साथ नीले रंग के झंडे को पाएंगे। हाल ही में जब पूरे देश में दलितों ने एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध किया था तो उस समय भी रैलियां नीले रंग के झंडों और टोपियों से पटी पड़ी थीं। जब भी दलितों का कोई मार्च या रैली निकलती है, तो उसमें भी नीला रंग लहराता दिखता है। तो आज हम आपको बताते हैं बाबा साहब और नीले रंग का क्या रिश्ता है।

अंबेडकर की पार्टी का रंग भी नीला था
आपको बता दें कि बीआर अंबेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar) ने अपनी एक पार्टी बनाई थी, जिसका नाम था 'इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी'। ऐसा कहा जाता है कि अपनी पार्टी के झंडे का रंग उन्होंने नीला रखा था। बता दें कि उन्होंने यह रंग महाराष्ट्र के सबसे बड़े दलित वर्ग महार के झंडे से लिया। साल 2017 में अर्थ नाम के जर्नल में 'फैब्रिक रेनेड्रेड आइडेंटिटीः ए स्टडी ऑफ पब्लिक रिप्रेजेंटेशन इन रंजीता अताकाती' में प्रकाशित शोध पत्र में भी यही बात कही गई है। अंबेडकर ने इस नीले रंग को दलित चेतना का प्रतीक माना था। जानकारों के मुताबिक नीला बाबा साहब का पसंदीदा रंग था और उन्होंने इसे अपने निजी जीवन में भी इस्तेमाल किया था।


बाबा साहब को नीले रंग का सूट बहुत पसंद था
ऐसा कहा जाता है कि बाबा साहब अंबेडकर को नीले रंग का सूट बहुत पसंद था। वो अक्सर नीले रंग का थ्री पीस सूट पहना करते थें। चूंकि अंबेडकर नीले रंग के सूट में होते थे, लिहाजा दलित समाज ने इस रंग को अपनी अस्मिता और प्रतीक के रूप में लिया और इस रंग को अपनाया। यही कारण है कि देशभर में अंबेडकर की जितनी भी मूर्तियां मिलेंगी सब नीले रंग में रंगी हैं।

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