जयपुर। इस बात को अरसा हुआ जब लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि कविता का कोई भविष्य नहीं है, लेकिन वो कविता ही है, जो अंधे कुएं से हमें खींच कर बाहर ले आती है। वो कविता ही है, जो बुरे वक्त में प्रार्थना में तब्दील होती हुई दिखाई देती है, वो भी कविता ही है, जो हमें आहिस्ता से बता देती है कि हंसी एक प्रार्थना है।