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दूल्हे की जगह दुल्हन चढ़ी घोड़ी, कारण जानकर रह जायेंगे हैरान

दूल्हे को पछाड़ दुल्हन हुई घोड़ी पर सवार, बनी मिसाल...

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जयपुर

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Rajesh

Mar 27, 2018

Bride rides horse as wedding ritual in Rajasthan

जयपुर।

शादी में बारातियों के सामने दूल्हे का घोड़ी पर चढ़ना और दुल्हन को डोली में बैठाकर घर लाना आम रस्म है। लेकिन यही रस्म तब खास हो जाती है जब दुल्हन डोली की जगह घोड़ी चढ़े और घरातियों के साथ शहर का चक्कर लगाए। भारतीय लड़कियों का सपना होता है कि एक दिन उनका राजकुमार घोड़ी पर सवार होकर आएगा और उन्हें दुल्हन बनाकर ले जाएगा। लेकिन बदलते दौर के चलते कुछ लोगों ने इन रीति रिवाजों को भी पीछे छोड़ दिया है।

हर किसी के उड़ गए होश...
हम यहां रेखा के मशहूर गाने 'दू्ल्हे राजा देख दुल्हनियां डोली लाई है' कि बात नहीं कर रहे है, हम बात कर रहे है राजस्थान के झुनझुनू के नवलगड़ की जहां सोमवार को एक युवती जब घोड़े पर बैठकर बारात लेकर निकली तो हर किसी के होश ही उड़ गए, क्योंकि इन लोगों ने घोड़े पर एक दुल्हे को नहीं बल्कि दुल्हन को देखा।

ऑफिसर नीलम नाम की इस दुल्हन ने...
नवलगड़ की आईओसीएल ऑफिसर नीलम नाम की इस युवति ने ऐसा अपने परिवार के कहने पर किया। दरसल, दुल्हन के माता-पिता समाज को संदेश देना चाहते थे कि बेटियों और बेटों पर कोई फर्क नहीं होता। दोनों को समान अवसर मिलने चाहिए। हर किसी ने इस पहल की तारीफ भी की और अब ये युवति मीडिया की सुर्खियों के जरिए पूरे देश में लोकप्रिय हो गई।

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एक-दूसरे को पहनाई वरमाला...
शादी में खास बात यह थी कि दुल्हन की भी बारात उनके घर से उठी और दूल्हे के घर होती हुई विवाह स्थल पर पहुंची। इस दौरान सभी रिश्तेदारों ने जमकर डांस किया। बैंड-बाजों और साजो सामान के साथ पूरी शान-ओ-शौकत के साथ नेहा अपने पति के घर पहुंची। यहां पर बारात के साथ लड़के के घरवालों ने भी डांस किया। इसके बाद आईओसीएल ऑफिसर नीलम (दुल्हन) ने दूल्हे के घर के पास अपना घोड़ा रोका और सीधे वरमाला स्टेज पर गई। जहां दूल्हा और दुल्हन ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई।

पहले भी होता था ऐसा...
राजस्थान में पहले के समय में बंनोली प्रथा के तहत दुल्हन इसी तरह से साज श्रंगार के साथ अपने रिश्तेदार के यहां जाती थी। उन दिनों शादी करीब 25-30 दिन की होती थी। इसलिए लड़की पक्ष के रिश्तेदार दूल्हा और दुल्हन समेत सारे रिश्तेदारों को अपने घर पर खाने के लिए आमंत्रित करते थे। इस दौरान बंनोली में दु्ल्हा और दुल्हन अपने - अपने रिश्तेदारों के साथ इसी तरह खाना खाने जाते थे।