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Chaitra Navratri 2023 : अभिजित मुहूर्त में नहीं होगी इस बार नवरात्र में घट स्थापना

Chaitra Navratri 2023 : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 22 मार्च को भारतीय नव संवत्सर—2080 का आगाज होगा, इसी दिन ब्रह्म योग व शुक्ल योग के साथ बुधवार और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में बसंत नवरात्र भी शुरू होंगे। सुबह द्विस्वभाव लग्न में घर—घर घट स्थापना होगी।

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Chaitra Navratri 2023 : जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 22 मार्च को भारतीय नव संवत्सर—2080 का आगाज होगा, इसी दिन ब्रह्म योग व शुक्ल योग के साथ बुधवार और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में बसंत नवरात्र भी शुरू होंगे। सुबह द्विस्वभाव लग्न में घर—घर घट स्थापना होगी। वहीं मंदिरों में रामचरितमानस व दुर्गाशप्तशती के पाठ शुरू होंगे। इस बार देवी मां नाव पर सवार होकर आ रही है। नवरात्र में 9 दिन शुभ संयोग रहेंगे, जो खुशहाली लेकर आएंगे।

ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि चैत्र माह के बसंत—नवरात्र की शुरुआत बुधवार को हो रही है। इस दिन द्विस्वभाव लग्न में प्रात:काल घट स्थापना होगी। नवरात्र की शुरुआत बुधवार को होने से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:10 से दोपहर 12:58 बजे तक) को टालना चाहिए। इस बार नौ दिन के नवरात्र होंगे। दुर्गा मां नाव पर सवार होकर आएगी, जो मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली होगी। नवमी को माता मनुष्य की सवारी करते हुए जाएगी, जो कि सुख व शांति में वृद्धि करेगी।

ज्योतिषाचार्य पं. चन्द्रमोहन दाधीच ने बताया कि चैत्र नवरात्र इस बार बुधवार से शुरू हो रहे है, बुध को व्यापारिक ग्रह माना जाता है, अत: व्यापार से जुड़े लोगों को खासकर खाद्य सामग्री से जुड़े विशेष लाभ होने की संभावना रहेगी। इस दिन शनि का नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद भी रहेगा, ऐसे में लोहा, डीजल, आॅयल, पेट्रोल, खनिज व शेयर मार्केट से जुड़ व्यापारियों पर भी माता रानी की कृपा बरसेगी। इस दिन मित्र राशि मीन के चन्द्रमा भी पूरे वर्ष शांति व सौहार्द के वातावरण रखेंगे।


घट स्थापना के मुहूर्त
द्विस्वभाव लग्न में प्रात:काल घट स्थापना
1. प्रात: 06:33 से प्रात: 07:40 (सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त)
2. प्रात: 11:14 से दोपहर 12:10 (द्विस्वभाव मिथुन लग्न)
3. प्रात: 06:33 से प्रात: 09:33 (लाभ-अमृत का चौघड़िया)
4. प्रात: 11:04 से दोपहर 12:10 (शुभ का चौघड़िया)

नवरात्र के 9 दिन, व्रत—पर्व भी
— 22 मार्च : प्रथम नवरात्र, नवरात्र स्थापना, बसंत नवरात्र प्रारंभ, घट स्थापना, शैलपुत्री का पूजन
— 23 मार्च : द्वितीय नवरात्र, सिंजाजा, चेटीचण्ड, झूलेलाल जयंती, ब्रह्मचारिणी का पूजन
— 24 मार्च : तृतीय नवरात्र, गणगौर पूजन, मेला गणगौर, चन्द्रघण्टा का पूजन
— 25 मार्च : चतुर्थ नवरात्र, मेला बूढ़ी गणगौर, कूष्माण्डा का पूजन
— 26 मार्च : पंचम नवरात्र, श्री-लक्ष्मी पंचमी, स्कन्दमाता का पूजन
— 27 मार्च : षष्ठ नवरात्र, यमुना जयंती, कात्यायनी का पूजन
— 28 मार्च : सप्तम नवरात्र, कालरात्रि का पूजन
— 29 मार्च : अष्टम नवरात्र, दुर्गाष्टमी, महाष्टमी, महागौरी का पूजन
— 30 मार्च : नवम नवरात्र, श्री राम नवमी, नवरात्र पूर्ण, सिद्धिदात्री का पूजन
— 31 मार्च : नवरात्र व्रत पारणा व उत्थापन

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नवरात्र में कब कौनसे शुभ संयोग
22 मार्च — ब्रह्म योग व शुक्ल योग
23 मार्च - सर्वार्थसिद्धि योग संपूर्ण दिन-रात
24 मार्च - सर्वार्थसिद्धि योग सूर्योदय से दोपहर 1:22 बजे, राजयोग दोपहर 1:22 से शाम 5 बजे तक, रवि योग दोपहर 1:22 बजे से शुरू
25 मार्च - रवि योग दोपहर 1:19 बजे तक
26 मार्च - रवि योग प्रारंभ दोपहर 02:01 बजे
27 मार्च - सर्वार्थसिद्धि योग सूर्योदय से संपूर्ण दिन—रात, कुमार योग सूर्योदय से दोपहर 3:27 बजे तक, रवियोग समाप्त दोपहर 3:27 बजे, अमृतसिद्धि योग शाम 5:28 बजे से अगले दिन सूर्योदय तक
28 मार्च - द्वि पुष्कर योग व राजयोग सूर्योदय से शाम 5:32 बजे तक
29 मार्च - रवि योग प्रारंभ रात 08:07 बजे
30 मार्च - सर्वार्थसिद्धि योग व रवि योग सूर्योदय से संपूर्ण दिन—रात, गुरु पुष्य योग रात 10:59 बजे से शुरू, अमृत सिद्धि योग रात 11:31 बजे से अगले सूर्योदय तक


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