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आसमान में आज होगी अद्भुत खगोलिय घटना, वैज्ञानिकों ने कहा- डरे नहीं, जरूर देखें ये अनुपम नजारा, वीडियो में जानें क्या होगा खास

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जयपुर

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Dinesh Saini

Jul 27, 2018

Lunar Eclipse 2018

जयपुर। सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण आज शुक्रवार को होने वाला है। ये साल का दूसरा चंद्रग्रहण है। 2018 की 31 जनवरी को साल का पहला चंद्रग्रहण था। इस ज्योतिषीय घटना से चंद्रमा लाल और भूरे रंग का दिखाई देगा। आंशिक ग्रहण रात 11 बजकर 54 मिनट और पूर्ण ग्रहण 28 जुलाई रात 01 बजे से शुरू होगा। पूर्ण ग्रहण की अवधि करीब 104 मिनट की होगी। इसके बाद ग्रहण फिर आंशिक हो जाएगा, जो भारतीय समयानुसार 03 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा।

खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि यह देश के सभी हिस्सों में दिखेगा लेकिन जैसलमेर, लेह, लद्दाख आदि में चंद्रग्रहण का नजारा सबसे अच्छा दिखेगा। इससे पहले जनवरी को इस सदी का अनूठा ब्लू मून ग्रहण हुआ था। यह पूर्ण चंद्रग्रहण था और भारत से देखा जा सका था। ऐसा विशिष्ट ग्रहण भारत में 174 साल बाद हुआ था।


खगोल वैज्ञानिक ग्रहण से जुड़ी भय और आशंकाओं को सिरे से खारिज कर आधुनिक वैज्ञानिक विचारधारा अपनाने पर जोर देते हैं। इसी संदर्भ को लेकर पत्रिका ने भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर रमेश कपूर और नेहरू तारामंडल मुंबई के पूर्व निदेशक पीयूष पाण्डेय से विशेष चर्चा की। दोनों विशेषज्ञों ने आमजन के लिए संदेश दिया है कि भय और आशंकाएं त्याग दीजिए और यह विलक्षण चन्द्रग्रहण जरूर देखिए।

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि चंद्रग्रहण के दौरान रात के समय आसमान का नजारा विलक्षण होगा। जहां चंद्रमा पूर्ण ग्रहण के समय लालिमा लिए होगा वहीं उससे 7 डिग्री नीचे एक लाल रंग का सितारा भी चमक रहा होगा। यह मंगल ग्रह होगा,जो इन दिनों पृथ्वी के निकट है। दरअसल, वर्ष 2003 के बाद पृथ्वी और मंगल इतनी बेहद निकटता से गुजरेंगे जिससे मंगल ग्रह काफी चमकीला नजर आएगा। उसका मैग्नीट्यूड -2.77 होगा। शुक्रवार का चंद्रग्रहण जुलाई-अगस्त के दौरान ग्रहणों की तिकड़ी का हिस्सा है। 13 जुलाई को आंशिक सूर्यग्रहण था। हालांकि, यह देश में नहीं दिखा था


प्रो. कपूर के मुताबिक यह संयोग है कि ग्रहण तभी होते हैं जब ज्वार-भाटा अपने चरम पर होता है। क्योंकि ग्रहण या तो अमावस्या या पूर्णिमा के दिन होते है। इसलिए यह कहना ठीक नहीं कि ग्रहणों के कारण ज्वार-भाटा होता है। तो वहीं पीयूष पांण्डेय के अनुसार जब चंद्रमा पृथ्वी के छायावृत के मध्य से गुजरता है तब पूर्ण चंद्रग्रहण की अवधि अधिकतम1 घंटा 47 मिनट होती है। इस बार लगभग वही स्थिति है। इससे पहले 16 जुलाई 2000 को ऐसा ग्रहण हुआ था, जिसकी अवधि महत्तम थी।