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बिस्तर गीला करने वाले बच्चों में किडनी रोग का खतरा

समय पर जांच और इलाज से पूर्ण समाधान संभव वर्ष 2023 विश्व गुर्दा दिवस किडनी हैल्थ फॉर ऑल घोषित यदि आपका बच्चा 5 वर्ष की आयु के बाद भी बिस्तर गीला कर रहा है या बार-बार पेशाब की समस्या से परेशान है तो इसे सिर्फ आदत समझकर टालें नहीं। समय पर ध्यान नहीं देने पर 50 प्रतिशत बच्चों के लिए भविष्य में यह गुर्दे की बीमारी या संक्रमण का कारण भी हो सकता है।

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जयपुर

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Vikas Jain

Mar 09, 2023

World Kidney Day:  देश भर में पौने दो लाख किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत, हो रहे सिर्फ 10 हजार

World Kidney Day: देश भर में पौने दो लाख किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत, हो रहे सिर्फ 10 हजार

जयपुर. यदि आपका बच्चा 5 वर्ष की आयु के बाद भी बिस्तर गीला (bed wetting) कर रहा है या बार-बार पेशाब (urine problem) की समस्या से परेशान है तो इसे सिर्फ आदत समझकर टालें नहीं। समय पर ध्यान नहीं देने पर 50 प्रतिशत बच्चों के लिए भविष्य में यह गुर्दे की बीमारी (kidney disease) या संक्रमण (infection) का कारण भी हो सकता है।

गुर्दा रोग विशेषज्ञ व सवाई मानसिंह अस्पताल (sawaimansingh hospital jaipur) के पूर्व अधीक्षक डॉ.एल.सी.शर्मा के अनुसार बार-बार पेशाब आना, रात में सोते समय पेशाब आना, पेशाब में जलन होना या बच्चे का पेशाब के समय रोना, एक बार पेशाब करने के बाद दुबारा जाना जैसे लक्षण 50 प्रतिशत बच्चों में गुर्दे की बीमारी या संक्रमण के कारण हो सकते हैं। समय पर इलाज से इस बीमारी से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य लक्षणों से भी बीमारी की गंभीरता को स्वयं के स्तर पर समझा जा सकता है। मौसम में बदलाव और कोविड महामारी से भी गुर्दे की बीमारी बढ़ रही है। वर्ष 2023 विश्व गुर्दा दिवस को किडनी हैल्थ फॉर ऑल घोषित किया गया है।

गर्भावस्था में अनियंत्रित बीपी, शुगर से खराब हो रही किडनी

गर्भावस्था (pregnency) में स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही बरतना गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इस दौरान अनियंत्रित बीपी (bp) और शुगर (diabities) से उन्हें किडनी से संबंधित बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। राजधानी के निजी व सरकारी अस्पतालों में ऐसे केस लगातार देखे जा रहे हैं। हालांकि शुगर की शिकायत कुछ ही महिलाओं में होती है, लेकिन इस समय उनमें उच्च रक्तचाप होना आम बात है। जिससे किडनी संबंधी दिक्कते होती है। सवाईमानसिंह अस्पताल हर माह 5 से 10 गर्भवती महिलाएं (pregnent women) एक्यूट किडनी इंजरी से ग्रस्त होकर एसएमएस अस्पताल पहुंच रही हैं। उन्हें डायलिसिस की भी जरूरत पड़ती है।

इनमें अधिकांश ठीक हो जाती हैं, लेकिन 2-3 महिलाएं क्रोनिक किडनी डिजीज का शिकार हो जाती है। जिससे उन्हें ताउम्र किडनी की समस्या से जूझना पड़ता है।