
China, Pakistan, Afghanistan And Haqqani Network Nexus
जयपुर
China, Pakistan, Afghanistan And Haqqani Network Nexus : एक तरफ चीनी खुफिया एजेंसी एमएसएस के मुखिया चेन वेनकिंग पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुट के मुखिया और आतंकी गुट प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी से अफगानिस्तान में पिछले सप्ताह मुलाकात कर रहे थे तो ठीक उसी सप्ताह चीनी सैनिक तवांग सेक्टर की भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की।
भारतीय सैनिकों ने तत्काल ही चीनियों को रोका और उचित जवाब देते हुए स्थानीय स्तर पर निर्धारित प्रोटोकाल के तहत चीनी सैनिकों की वापसी तय की। चीनी जिस तरह से मध्य एशिया में अपने हाथ पैर चला रहा है। भारतीय नीतियां उसके आडे आ रही है। ऐसे में ठीक एक साल बाद भारत से सटी चीनी की सीमा लददाख से लेकर अरुणाचल तक सक्रिय हो उठी है।
भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हक्कानी का जिस तरह से पाकिस्तान में रूचि है ऐसे में चीन से बन रही पैठ नजर रखना बेहद जरूरी है। हक्कानी की अफगानिस्तान में ताजपोशी कराने में जितना हाथ पाकिस्तान का है। उससे कहीं ज्यादा हाथ चीन का है। यह अलग बात है कि चीनी खुफिया एजेंसी एमएसएस का हाथ इतनी जगह से काम करता है कि सीधे उसका हाथ दिखाई नहीं देता है।
ऐसे एक्टिव हुई सीमा
तवांग, अरूणाचल प्रदेश
पूर्वी कमान के अतंर्गत 1327 किलोमीटर की सीमा पर चीनियों ने फिर से दखलंदाजी शुरू कर दी है। पिछले सप्ताह हुई झडप में भारतीय सैनिकों ने न केवल चीनियों को पीछे धकेल दिया बल्कि भारतीय सीमा में आने पर उन्हें हिरासत में भी ले लिया और वार्ता के बाद छोडा गया। इसी कमान के अंतर्गत जनरल सगत सिंह ने 1967 में करीब 350 चीनी सैनिक मारे थे।
बारा होती,उत्तराखंड
मध्य कमान के अंतर्गत आने वाले 554 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी चीनी सैनिकों ने दखलंदाजी शुरू कर दी है। चीनी खुफिया एजेंसी एमएसएस की चाल अब चीन से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा साफ नजर आने लगी है। 30 अगस्त को करीब 100 सैनिकों ने यहां आकर एक पुल तोड दिया और वापस चले गए। यह जगह की सुरक्षा आईटीबीपी के हाथ में है।
लेह,लददाख
उत्तरी कमान के अंतर्गत आने 520 किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा 2020 से काफी सक्रिय है। इसकी गंभीरता का अंदाजा गलवान घाटी में हुई झडप से लगा सकते हैं। इसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए थे तो चीन के करीब 35 सैनिक मारे गए थे। फिलहाल भारत और चीन के बीच 12 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन अभी कई पोस्ट से चीनियों का पीछे हटना बाकी है।
...तो इसलिए चीन की है नजर
यूं तो चीनियों की चाल हर समय अलग ही तरीके से देखने को मिलती है लेकिन सैन्य विशेषज्ञों की माने तो अगले दलाईलामा का जन्म अरुणाचल प्रदेश में होता है। ऐसे में चीन इस क्षेत्र को लेकर काफी ज्यादा सक्रिय है। यही वजह कि उसने एक साथ अपने पूरे पश्चिम थियेटर कमान को सक्रिय कर दिया है।
सामरिक शक्ति में श्रेष्ठता
महार रेजीमेंट के पूर्व कर्नल और मेजर जनरल सुधाकर जी (सेवानिवृत) ने बताया कि चीनियों के सामने 1967 में जनरल सगत सिंह के नेतृत्व में भारतीय सेना ने जो सामरिक श्रेष्ठता और आत्मबल हासिल किया। वह आज भी विद्यमान है। तवांग में चीनी सैनिकों को हिरासत में लेकर फिर वार्ता के बाद वापस किया। गलवान में वीर जवानों ने श्रेष्ठता पहले ही साबित कर दी है और दिखा दिया है कि चीन अविजित नहीं है।
Published on:
09 Oct 2021 09:07 pm

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