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बेटे को पहले हुआ लकवा फिर किडनी खराब, हर दूसरे दिन डायलिसिस, फिर भी नहीं पसीजा दिल

दिव्यांग को अपने परिवार के साथ रहने के लिए स्थानांतरण पाने का हक होने के बावजूद सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई।

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शैलेंद्र शर्मा/जयपुर। वह तो पहले से ही 80 फीसदी नि:शक्त थी। इसके बावजूद जैसे-तैसे हिम्मत जुटाकर पति के साथ कंधा से कंधा मिलाकर सरकारी स्कूल में प्रबोधक के पद पर काम करने में जुट गई। ताकि उनका बेटा व बेटी को अच्छी परवरिश के जरिए पढ़ा-लिखाकर एक बेहतरीन इंसान बना सके। वह 2008 से लगातार जयपुर से करीब 200 किमी दूर गंगापुर सिटी स्थित स्कूल में नौकरी करने जाया करती थी।

मां-पिता के नौकरी पर जाने के बाद दोनों भाई-बहन खाना पीना अपने हाथों से करने के बाद पढ़ाई के लिए पहुंचते थे। हालांकि मां तो हफ्ते में एक बार शनिवार शाम को ही जयपुर आया करती थी। इननी कठिनाई व मुसीबत भरे पलों में भी पूरा परिवार एकजुट होकर जैसे-तैसे नियति के इस फैसले को मानकर संघर्ष में जुटा हुआ था। इस दौरान आशा ने जयपुर स्थानांतरण के लिए भी अपने विभाग में अर्जी लगाई, दिव्यांग को अपने परिवार के साथ रहने के लिए स्थानांतरण पाने का हक होने के बावजूद सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई।

इसी बीच इस परिवार में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको हिलाकर रख दिया। हम बात कर रहे है जगतपुरा निवासी आशा शर्मा की। जो अभी गंगापुर सिटी के हरिपुरा मैडी के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में प्रबोधक के पद पर कार्यरत है। दोनों पैरो से करीब 80 फीसदी दिव्यांग महिला है। जो पिछले दस साल से इसी विद्यालय में पैराटीचर के पद पर काम कर चुकी है। आशा शर्मा का पूरा परिवार जिसमें पति, बेटे व बेटी है। इसी बीच करीब दो साल पहले बेटे 15 वर्षीय मासूम बेटे अभिषेक को बुखार होने पर इलाज कराया गया। गंभीर बीमार होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। चूंकि आशा शर्मा को नौकरी की वजह से बार-बार गंगापुर सिटी जाना पड़ता था।

विभाग का नहीं पसीजा दिल
इसी बीच आशा शर्मा ने अपने विभाग में अपने परिवार की पीड़ा को बयां करते हुए जयपुर ट्रांसफर की गुहार की, लेकिन विभाग का दिल नहीं पसीजा। वह विशेष योग्यजन आयोग पहुंची तो वहां सुनवाई हुई और आयुक्त ने प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर को उसका तुरंत जयपुर स्थानांतरण करने के निर्देश दिए, लेकिन कोई असर नहीं। आयुक्त की ओर से रिमाइंडर भेजे गए। फिर भी विभाग टस से मस नहीं हुआ। आशा अपनी नौकरी, परिवार को संभालने के साथ-साथ ट्रांसफर के लिए अपने विभाग, सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री, जयपुर सांसद, विशेष योग्यजन आयोग के चक्कर काटकर अपने बेटे व परिवार की भीख मांगने को मजबूर है।

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